महाराष्ट्र: शिवजयंती पर शिवनेरी किले में उमड़ी भीड़ से अव्यवस्था और भगदड़

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Sandeep Srivastava
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शिवजयंती पर शिवनेरी किले में उमड़ी भारी भीड़ के कारण अव्यवस्था और भगदड़ जैसे हालात बन गए।

शिवजयंती पर शिवनेरी किले में उमड़ी भीड़ से अव्यवस्था

महाराष्ट्र: छत्रपति शिवाजी महाराज की तीन सौ छियानबेवीं जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र के जुन्नर तालुका स्थित शिवनेरी किले में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जन्मस्थली पर दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए देर रात से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह होते होते भीड़ लगातार बढ़ती गई जिससे किले के प्रवेश और आंतरिक मार्गों पर दबाव बढ़ा। इसी दौरान अचानक अव्यवस्था फैल गई और भगदड़ जैसे हालात बन गए। अफरा तफरी के बीच महिलाएं और बच्चे भी चपेट में आए। कई लोग गिर पड़े और कुछ को हल्की चोटें आईं। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की और घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ समय के लिए प्रवेश मार्गों पर आवाजाही रोकी गई।

तंग मार्गों पर दबाव से बिगड़ी स्थिति

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार रात से ही बढ़ती भीड़ के कारण किले के संकरे रास्तों पर लगातार दबाव बनता गया। विशेष रूप से अंबरखाना के नीचे स्थित हाथी दरवाजा क्षेत्र और गणेश दरवाजा जैसे तंग मार्गों पर एक समय में जरूरत से ज्यादा लोग जमा हो गए। इन रास्तों की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि थोड़ी सी अव्यवस्था भी गंभीर स्थिति में बदल सकती है। भीड़ के एक साथ आगे बढ़ने से धक्का मुक्की बढ़ी और भगदड़ जैसे हालात बने। मौके पर पुणे जिले की पुलिस के जवानों ने व्यवस्था बहाल करने के प्रयास तेज किए लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से अधिक होने के कारण स्थिति पर काबू पाने में समय लगा।

प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जुन्नर तालुका में स्थित किले पर बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और भीड़ प्रबंधन के संसाधन मौके पर मौजूद नहीं थे। हर वर्ष शिवजयंती पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं इसके बावजूद इस बार यातायात नियंत्रण प्रवेश और निकास के अलग मार्ग तथा सुरक्षा घेरे की व्यवस्था नाकाफी नजर आई। स्थानीय नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि पहले से ठोस योजना बनाई जाती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। घटना के बाद प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठे हैं और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए व्यापक इंतजाम की मांग तेज हो गई है।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन का बयान

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है और किसी भी व्यक्ति की जान को खतरा नहीं हुआ। घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि आगे से शिवजयंती जैसे आयोजनों के लिए भीड़ प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी। साथ ही प्रवेश और निकास मार्गों को अलग अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि दबाव एक स्थान पर न बने।

पृष्ठभूमि में शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक महत्व

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म उन्नीस फरवरी सोलह सौ तीस को शिवनेरी किले में हुआ था। उन्होंने मुगल सत्ता और दक्कन की सल्तनतों के बीच मराठा राज्य की नींव रखी। माता जिजाऊ और गुरु दादोजी कोंडदेव के सान्निध्य में उनके व्यक्तित्व का निर्माण हुआ। कम उम्र में ही उन्होंने किलों पर अधिकार स्थापित करना शुरू किया और संगठित सैन्य शक्ति खड़ी की। उनकी युद्ध नीति विशेष रूप से छापामार रणनीति के लिए जानी जाती है जिसने बड़े साम्राज्यों को चुनौती दी।

शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था अपने समय से आगे मानी जाती है। अष्टप्रधान मंडल के माध्यम से शासन को सुव्यवस्थित किया गया। किसानों की सुरक्षा व्यापार मार्गों की रक्षा और महिलाओं के सम्मान को लेकर सख्त नियम लागू किए गए। पश्चिमी तट पर नौसेना को मजबूत किया गया और समुद्री किलों की शृंखला खड़ी की गई। उनके शासन में विभिन्न समुदायों को समान संरक्षण मिला जिससे सामाजिक संतुलन बना रहा।

भविष्य के लिए सुरक्षा व्यवस्था की मांग

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि आगे से शिवजयंती जैसे बड़े आयोजनों के लिए पहले से विस्तृत योजना बनाई जाए। श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग तय किए जाएं। भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में बैरिकेडिंग हो और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल स्वयंसेवक तथा चिकित्सा दल मौजूद रहें। लोगों का कहना है कि श्रद्धा के साथ आने वाले नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

शिवनेरी किले पर उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि सदियों बाद भी लोगों के मन में शिवाजी महाराज के प्रति श्रद्धा और सम्मान बना हुआ है। लेकिन इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आस्था से जुड़े बड़े आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्था की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे आयोजनों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित कैसे बनाया जाए ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।