वाराणसी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘चतुरंगिणी सेना’ गठन की घोषणा, गौ-धर्म संरक्षण पर जोर
वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को गौ, धर्म और ब्राह्मणों की रक्षा के उद्देश्य से ‘चतुरंगिणी सेना’ के गठन की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा के साथ-साथ एकजुटता और जागरूकता को बढ़ावा देना बताया गया है।
संरचित संगठनात्मक ढांचा होगा तैयार
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि इस सेना में विभिन्न पदों का गठन किया जाएगा, जिनमें पतिपाल, सेनामुखपति, गुल्मपति, गणपाल, वाहिनीपति, पृतनापति, चमुपति, अनीकिनीपति और महासेनापति शामिल होंगे। इसके माध्यम से संगठन को व्यवस्थित और प्रभावी रूप से संचालित किया जाएगा।
धार्मिक मूल्यों की रक्षा और एकता पर जोर
उन्होंने कहा कि चतुरंगिणी सेना उन सभी लोगों के लिए एक मंच प्रदान करेगी जो गौ, धर्म और ब्राह्मणों की रक्षा के प्रति समर्पित हैं। यह संगठन समाज में एकता की भावना को मजबूत करेगा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का कार्य करेगा।
अंतिम पंक्ति के लोगों की रक्षा का लक्ष्य
स्वामी ने बताया कि यह सेना समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सनातनी लोगों की सुरक्षा और सहयोग के लिए कार्य करेगी। इसका उद्देश्य अभिभावकत्व की भावना को मजबूत करना और समाज के कमजोर वर्गों को संरक्षण देना है।
चार स्तंभों पर आधारित होगा संचालन
उन्होंने जानकारी दी कि संगठन में चार अंगाध्यक्ष होंगे, जो मनबल, तनबल, धनबल और जनबल का संचालन करेंगे। इनके अंतर्गत अलग-अलग प्रभागों का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करेंगे।
जागरूकता और अधिकारों के प्रति सजगता
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चतुरंगिणी सेना का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और लोगों को अपने धार्मिक अधिकारों के प्रति सजग करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब सांस्कृतिक मूल्यों पर खतरा महसूस किया जा रहा है, तब इस प्रकार की पहल आवश्यक हो जाती है।
हिंसा से दूर रहने की अपील
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संगठन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देना नहीं है। यह पूरी तरह से सकारात्मक सामाजिक बदलाव और जागरूकता फैलाने के लिए कार्य करेगा।
धर्मप्रेमियों से जुड़ने की अपील
कार्यक्रम के अंत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी धर्मप्रेमियों से इस पहल में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि एकजुटता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है और मिलकर ही सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
यह पहल वाराणसी से शुरू होकर व्यापक स्तर पर समाज में सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना को सुदृढ़ करने का प्रयास मानी जा रही है।
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