माघ मेला में स्नान से वंचित रहने के बाद काशी रवाना हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या पर संगम स्नान न कर पाने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार की सुबह प्रयागराज से काशी के लिए रवाना हो गए। स्नान के लिए जाते समय प्रशासन द्वारा रोके जाने को लेकर विवाद की स्थिति बनी जिसके बाद उन्होंने संगम में स्नान नहीं किया और बिना अनुष्ठान पूर्ण किए ही मेला क्षेत्र छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
प्रयागराज से प्रस्थान करने से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्तमान समय में सनातन परंपरा को मानने वाले लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातनियों के अधिकारों और संस्कारों को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है और प्राचीन मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर उन्हें स्नान से रोका गया जो उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक अनुभव रहा। उनके अनुसार संतों और बटुकों के साथ मारपीट हुई और स्वयं उनका भी अपमान किया गया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस विषय में मुख्यमंत्री द्वारा कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने जीवन में इतना कष्ट कभी अनुभव नहीं हुआ और वे अपने सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
उन्होंने सनातन धर्म को मानने वाले लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया और कहा कि समाज को यह समझना होगा कि कौन वास्तव में सनातन मूल्यों के साथ खड़ा है और कौन केवल दिखावे के लिए धर्म की बात करता है। उनके इस बयान के बाद धार्मिक संगठनों और संत समाज के बीच भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। काशी रवाना होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि यह मामला केवल माघ मेला तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आगे भी इस पर व्यापक चर्चा और आंदोलन की संभावना बनी हुई है।
