ट्रंप के बयान से वैश्विक बाजारों में भूचाल, भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट
नई दिल्ली मुंबई: आज गुरुवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार ने बेहद कमजोर शुरुआत की जिसने निवेशकों को चौंका दिया। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज की गई जिससे दलाल स्ट्रीट पर हलचल बढ़ गई। शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स करीब 1500 अंकों तक लुढ़क गया जबकि निफ्टी भी लगभग डेढ़ प्रतिशत टूटकर नीचे आ गया। बाजार में यह गिरावट केवल तकनीकी कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ी भू राजनीतिक अनिश्चितताओं का सीधा असर मानी जा रही है।
शुरुआती कारोबार में भारी दबाव
सुबह करीब 9 बजकर 16 मिनट पर सेंसेक्स 1385.82 अंक यानी 1.89 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71748.50 पर कारोबार करता नजर आया जबकि निफ्टी 426.40 अंक यानी 1.88 प्रतिशत टूटकर 22253.00 पर पहुंच गया। बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही जहां केवल 566 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई वहीं 1823 शेयरों में गिरावट आई और 130 शेयर स्थिर रहे। ये आंकड़े बताते हैं कि बिकवाली व्यापक स्तर पर हुई और लगभग सभी सेक्टर इसके प्रभाव में रहे।
वैश्विक तनाव का बाजार पर असर
बाजार में आई इस गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के साथ जारी तनाव को लेकर किसी त्वरित समाधान का संकेत नहीं दिया बल्कि आने वाले दो से तीन सप्ताह में कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई। इस बयान ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है और एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
भू राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है जो भारत जैसे आयात आधारित देश के लिए चिंता का विषय है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और कंपनियों की लागत भी बढ़ जाती है जिससे उनके मुनाफे और शेयर कीमतों पर असर पड़ता है।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट
बाजार में गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी साफ दिखाई दिया। बीएसई का कुल मार्केट कैप जो बुधवार को करीब 422.01 लाख करोड़ रुपये था वह गिरकर लगभग 412 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया। यानी कुछ ही समय में निवेशकों को करीब 11 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यह स्थिति बताती है कि बाजार वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति कितना संवेदनशील बना हुआ है।
विशेषज्ञों की राय और निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। वैश्विक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की संभावित बिकवाली भारतीय बाजार पर आगे भी दबाव बना सकती है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस तरह की गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है यदि वे मजबूत कंपनियों में सोच समझकर निवेश करें।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
भारत पर इसके व्यापक असर की बात करें तो सबसे पहले महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अलावा रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है जिससे आयात महंगा हो जाएगा। शेयर बाजार में अस्थिरता से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है जिसका असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ना स्वाभाविक है।
आने वाले दिनों पर टिकी नजर
कुल मिलाकर गुरुवार की यह गिरावट केवल एक दिन की हलचल नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संकेतों का परिणाम है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेंगी जो भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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