कृषि क्षेत्र से मजबूत होगी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, वन ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य में धान प्रणाली अहम
उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को महत्वपूर्ण आधार मान रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थिक सलाहकार केवी राजू ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति में कृषि क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि धान उत्पादन और उससे जुड़ी नीतियों को अधिक टिकाऊ और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है ताकि किसानों की आय बढ़े और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।
केवी राजू शनिवार को वाराणसी स्थित अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित दो दिवसीय उच्च स्तरीय नीति संवाद के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र और भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद के संयुक्त सहयोग से किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य विषय भारत में टिकाऊ और सुदृढ़ धान प्रणाली के लिए नीतियों का पुनर्गठन सीख और प्राथमिकताएं रखा गया है।
धान नीति के निष्कर्षों को सरकार करेगी लागू
कार्यक्रम में बोलते हुए केवी राजू ने कहा कि आइसार्क में शुरू किए गए इस उच्च स्तरीय नीति संवाद के दौरान जो भी महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आएंगे उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार कृषि और किसानों के हित में लागू करने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए लगातार नई नीतियां और योजनाएं लागू कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हो। इसके लिए कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
इस दो दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर डा अशोक गुलाटी ने कृषि नीतियों के सुधार और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
विश्व बैंक की कृषि विशेषज्ञ डा सौम्या श्रीवास्तव ने टिकाऊ कृषि प्रणाली और वैश्विक स्तर पर धान उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार रखे। वहीं फेडरेशन आफ सीड इंडस्ट्री आफ इंडिया के महानिदेशक डा परेश वर्मा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक कृषि प्रसार डा राजबीर सिंह ने भी धान उत्पादन और कृषि नीति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।
नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं की भागीदारी
इस नीति संवाद में विभिन्न सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी नीति निर्माता शोधकर्ता विकास सहयोगी संस्थाएं निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि और किसान भी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में धान उत्पादन से जुड़ी मौजूदा नीतियों की समीक्षा करना और भविष्य के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार करना है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग ले रहे हैं जिनमें मुख्यमंत्री के सलाहकार कृषि उत्पादन आयुक्त और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों विकास संगठनों तथा निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रतिनिधि भी इस संवाद में भाग ले रहे हैं।
कृषि सुधारों पर होगी व्यापक चर्चा
आयोजन के दौरान विशेषज्ञ धान उत्पादन से जुड़ी नीतियों कृषि तकनीकों और टिकाऊ कृषि प्रणाली पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धान उत्पादन को अधिक पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी बनाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और बेहतर नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा। इसी दिशा में इस नीति संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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