लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने यातायात नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले चालकों पर कड़ा शिकंजा कसते हुए नया प्रावधान लागू किया है। इसके तहत यदि किसी चालक के खिलाफ एक वर्ष के भीतर पांच चालान दर्ज होते हैं तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस स्वतः निलंबित कर दिया जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है।
अब तक चालान के आधार पर सीधे ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान नहीं था। इसके लिए अपराध की गंभीरता साबित करनी पड़ती थी, जैसे अत्यधिक नशे की हालत में वाहन चलाना, खतरनाक ओवरस्पीडिंग या जानलेवा लापरवाही। लेकिन नए नियमों के तहत अब बार-बार नियम तोड़ने को ही गंभीर मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि इससे सड़क पर अनुशासन बढ़ेगा और हादसों में कमी आएगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय के अपर सचिव महमदू अहमद द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ‘सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (तीसरा संशोधन) नियम 2026’ को लागू किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि 1 जनवरी 2026 से शुरू होकर अगले एक वर्ष के भीतर यदि किसी चालक के पांच चालान होते हैं तो मोटर वाहन नियम 21 के तहत उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। हालांकि, बीते वर्षों में हुए चालानों को इस गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
नए नियमों में डिजिटल प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया है। अब चालान पूरी तरह डिजिटल माध्यम से काटे जाएंगे और भुगतान भी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए करना अनिवार्य होगा। ट्रैफिक पुलिस या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी मौके पर या ऑनलाइन चालान जारी कर सकेंगे। चालान जारी होने के बाद चालक को तीन दिन के भीतर ऑनलाइन या 15 दिनों के भीतर फिजिकल माध्यम से जुर्माना जमा करना होगा। यदि 45 दिनों तक कोई जवाब नहीं दिया जाता है तो चालान को स्वतः स्वीकार मान लिया जाएगा और अगले 30 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा।
यदि कोई व्यक्ति चालान पर आपत्ति दर्ज कराता है तो संबंधित प्राधिकरण को उसकी सुनवाई करनी होगी और लिखित रूप में समाधान देना होगा। समाधान असंतोषजनक होने या आपत्ति खारिज होने की स्थिति में चालक 50 प्रतिशत जुर्माना जमा कर न्यायालय में अपील कर सकता है। जब तक पूरा जुर्माना जमा नहीं हो जाता, तब तक ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण, वाहन पंजीकरण जैसी सेवाएं रोक दी जा सकती हैं। इसके अलावा सरकारी पोर्टल पर वाहन की खरीद-फरोख्त पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
मंत्रालय के अनुसार इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाना है। आंकड़ों के मुताबिक बार-बार नियम तोड़ने वाले चालक ही सड़क हादसों का बड़ा कारण बनते हैं। ऐसे में केवल गंभीर अपराध साबित होने का इंतजार करने के बजाय, चालानों की संख्या के आधार पर लाइसेंस निलंबन का प्रावधान अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
आमतौर पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की अवधि करीब तीन महीने होती है। मंत्रालय का मानना है कि इस अवधि में चालक को अपनी गलती का एहसास होगा और भविष्य में वह नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह नियम जहां एक ओर सख्त है, वहीं सड़क सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम भी है, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार और आम लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
