यूजीसी बिल विरोध में यूपी भाजपा में उबाल, इस्तीफों और बहिष्कार से बढ़ा आंतरिक असंतोष

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यूजीसी बिल के नए प्रावधानों को लेकर यूपी में भाजपा नेताओं के इस्तीफे और विरोध तेज।

श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित यूजीसी बिल के विरोध ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर गहराते असंतोष को उजागर कर दिया है। श्रावस्ती और रायबरेली में सामने आए घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि यह मुद्दा अब केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सवर्ण समुदाय के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भेदभाव के आरोप लगाते हुए खुलकर विरोध शुरू कर दिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।

यूजीसी के नए प्रावधानों के खिलाफ मंगलवार को श्रावस्ती में भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक और सेवानिवृत्त शिक्षक राजकिशोर पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से सभी वर्गों, धर्मों और जातियों को साथ लेकर चलने की बात करती रही है, लेकिन यूजीसी के नए प्रावधानों में सवर्ण समुदाय को अलग-थलग कर दिया गया है। उनका आरोप है कि इन नियमों से कॉलेज परिसरों में तनाव बढ़ेगा और यदि सवर्ण छात्रों के साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार होता है, तो मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का “सबका साथ, सबका विकास” का नारा इस मामले में कमजोर पड़ता नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी इस्तीफा देकर आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

इसी कड़ी में श्रावस्ती में भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष उदय प्रकाश त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का बहिष्कार कर अपना विरोध दर्ज कराया। बातचीत में उन्होंने बताया कि वे किशोरावस्था से ही भाजपा से जुड़े रहे हैं और 17 वर्ष की उम्र में बूथ अध्यक्ष के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जो राष्ट्रवाद की बात करती है, लेकिन यूजीसी से जुड़े 13 जनवरी को लाए गए नए प्रावधानों में गठित कमेटी से सवर्ण समुदाय को बाहर करना समानता के अधिकार के खिलाफ है। उनका कहना है कि 2012 से लागू यूजीसी व्यवस्था में इस तरह का प्रावधान नहीं था और अब अचानक किया गया बदलाव असंतुलन पैदा कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मांग की है कि कमेटी में सवर्णों को शामिल किया जाए और झूठी शिकायतों पर सख्त दंड का प्रावधान किया जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।

रायबरेली और सलोन क्षेत्र में भी विरोध के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। भाजपा किसान मोर्चा के नेता रमेश बहादुर सिंह ने पार्टी के सवर्ण विधायकों और सांसदों को चूड़ियां भेजकर प्रतीकात्मक विरोध जताया है। वहीं, सलोन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष श्यामसुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपना इस्तीफा किसी स्थानीय पदाधिकारी को न देकर सीधे प्रधानमंत्री को भेजेंगे। श्यामसुंदर त्रिपाठी ने यूजीसी बिल को सवर्णों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह निर्णय उनके आत्मसम्मान और सामाजिक समानता के सवाल से जुड़ा है।

प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आ रहे ये घटनाक्रम भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष की ओर इशारा कर रहे हैं। पार्टी के छोटे और मध्यम स्तर के नेता जिस तरह खुलकर सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि यूजीसी बिल को लेकर असहमति अब दबे स्वर में नहीं रह गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर संवाद और संतुलन नहीं बनाया गया, तो यह असंतोष पार्टी के लिए एक बड़ी आंतरिक चुनौती बन सकता है। फिलहाल, यूजीसी बिल को लेकर उठ रहा यह विरोध प्रदेश की राजनीति में नई दिशा और नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है।