उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक करीब पच्चीस लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बुधवार से इन मतदाताओं की औपचारिक सुनवाई शुरू हो गई है जो अट्ठाइस जनवरी तक चलेगी। प्रशासन का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के पहले चरण में कुल एक करोड़ चार लाख ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया गया है जिनका रिकॉर्ड वर्ष दो हजार तीन की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है। इन्हीं मतदाताओं को चरणबद्ध तरीके से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। पहले चरण में जिन मतदाताओं को नोटिस दिए गए हैं उनकी सुनवाई प्रदेश भर में तय किए गए केंद्रों पर की जा रही है। पहले ही दिन प्रदेश के तीन हजार सात सौ तिरानबे स्थलों पर सुनवाई आयोजित की गई।
इस व्यापक प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अधिकारियों की तैनाती की है। कुल नौ हजार एक सौ चौवन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है जिनमें चार सौ तीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी शामिल हैं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे संबंधित मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच करें और यह तय करें कि मतदाता सूची में नाम बनाए रखने या हटाने को लेकर क्या निर्णय लिया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को सुनवाई के लिए सात दिन का समय दिया जा रहा है ताकि वे अपने दस्तावेज और आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत कर सकें। प्रशासन का कहना है कि यदि कोई मतदाता तय समय सीमा के भीतर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखता है तो उसकी बात को गंभीरता से सुना जाएगा। इसका मकसद किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटने से रोकना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि अपात्र या फर्जी नामों को सूची से हटाया जा सके।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार यह प्रक्रिया केवल पहले चरण तक सीमित नहीं है। दूसरे चरण में प्रदेश में दो करोड़ बाईस लाख ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया गया है जिन्हें तार्किक विसंगति की श्रेणी में रखा गया है। इनमें उम्र पते या अन्य विवरणों में असामान्य अंतर पाए गए हैं। इन मतदाताओं को फरवरी महीने में नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। दूसरे चरण की प्रक्रिया भी इसी तरह सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर पूरी की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद माना जाता है। इसी वजह से यह अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं बल्कि समय पर संबंधित केंद्र पर पहुंचकर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करें और प्रक्रिया में सहयोग करें।
यह अभियान आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं भी तेज हैं लेकिन चुनाव आयोग और प्रशासन का कहना है कि पूरा अभियान तय नियमों और संवैधानिक दायरे में रहकर संचालित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में दूसरे चरण की शुरुआत के साथ यह प्रक्रिया और व्यापक रूप लेगी और प्रदेश की मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।
