उत्तर प्रदेश हरित प्रदेश बनने की दिशा में तेजी, 9 वर्षों में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को ‘हरित प्रदेश’ बनाने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयास लगातार तेज होते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते 9 वर्षों में 242.13 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे प्रदेश के वनाच्छादन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में प्रदेश का वन क्षेत्र 559.19 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
2026 तक 277 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक कुल 277 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत वर्षाकाल 2026 में भी 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण करने की तैयारी की जा रही है। वन एवं पर्यावरण विभाग ने इसके लिए सभी जिलों, विभागों और संबंधित एजेंसियों को पहले से ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसके लिए प्रदेश की विभिन्न पौधशालाओं में 52 करोड़ से अधिक पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि लक्ष्य को समय से पहले पूरा किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर का पौधरोपण अभियान देश में पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा बदलाव
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2008 से 2016 के बीच 9 वर्षों में केवल 65.27 करोड़ पौधे लगाए गए थे, जबकि वर्ष 2017 के बाद से यह संख्या चार गुना से अधिक बढ़कर 242 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश में पर्यावरणीय नीतियों और जनभागीदारी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
वाराणसी में बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित एक वृहद पौधरोपण कार्यक्रम में मात्र एक घंटे के भीतर 2,51,446 पौधे लगाए गए, जिससे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित हुआ।
इस उपलब्धि ने चीन के 2018 में बनाए गए रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया और इसे एक जनांदोलन का रूप दिया गया।
सीएम योगी का व्यक्तिगत जुड़ाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस अभियान से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उनका जन्मदिन 5 जून को आता है, जो विश्व पर्यावरण दिवस भी होता है। इस अवसर पर वे हर वर्ष पौधरोपण कर अभियान की शुरुआत करते हैं और पूरे प्रदेश में इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है।
मुख्यमंत्री नियमित रूप से पौधरोपण कार्यक्रमों की समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और विभिन्न जिलों में जाकर खुद पौधे भी लगाते हैं। इससे प्रशासनिक मशीनरी के साथ-साथ आम जनता में भी जागरूकता बढ़ती है।
जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत
सरकार ने इस अभियान को जनांदोलन बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को इसमें शामिल किया है। स्कूली बच्चे, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी और सामाजिक संगठन इस अभियान का हिस्सा बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत भी प्रदेश में व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिली है।
इसके अलावा, 2025 में जन्मे 18,348 नवजात बच्चों के परिवारों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ प्रदान कर उन्हें पौधरोपण के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य पौधे और बच्चे दोनों के पालन-पोषण को समान महत्व देना है।
ग्रीन चौपाल से गांवों में जागरूकता
पर्यावरण संरक्षण को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ‘ग्रीन चौपाल’ की पहल भी शुरू की गई है। अब तक प्रदेश के 18,000 से अधिक गांवों में ग्रीन चौपाल का गठन किया जा चुका है।
इन चौपालों की अध्यक्षता ग्राम प्रधान करते हैं और इसमें विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। हर महीने इनकी बैठक आयोजित कर पौधरोपण और संरक्षण के विषय में जागरूकता बढ़ाई जाती है।
2030 तक हरित आवरण बढ़ाने का लक्ष्य
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए पौधरोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और पोषण भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं और बजट प्रावधानों के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
बजट में विशेष प्रावधान
राज्य सरकार ने सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। इसके अलावा पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये और प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इन योजनाओं के माध्यम से न केवल पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम
उत्तर प्रदेश में चल रहा यह व्यापक पौधरोपण अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लगातार बढ़ते वनाच्छादन और जनभागीदारी से यह स्पष्ट है कि राज्य पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस और दीर्घकालिक कदम उठा रहा है।
आने वाले वर्षों में यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे, तो उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी हरित राज्यों में शामिल हो सकता है और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल पेश कर सकता है।
LATEST NEWS