वाराणसी: कफ सिरप कांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस संगठित अपराध में शामिल मुख्य आरोपी विकास सिंह नरवे दो बार नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन वाराणसी पुलिस ने समय रहते जाल बिछाकर उसे दबोच लिया। उसके साथ ही सिंडीकेट से जुड़े दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस कार्रवाई के बाद इस अवैध नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं और जांच में करोड़ों रुपये के हवाला कारोबार का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, कफ सिरप कांड में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही विकास सिंह नरवे फरार चल रहा था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था और दो बार नेपाल सीमा पार करने की कोशिश कर चुका था। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने नेपाल बॉर्डर पर निगरानी बढ़ाई और सटीक रणनीति के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि विकास सिंह और उसके सहयोगी अंकित श्रीवास्तव ने मिलकर एक संगठित सिंडीकेट खड़ा किया था, जिसके जरिए हवाला नेटवर्क से करीब 34 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में आकाश पाठक उर्फ लल्लू की अहम भूमिका थी। वह कारोबार का पूरा हिसाब-किताब रखता था और अवैध धन के लेनदेन को मैनेज करता था। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए फर्जी कंपनियों और बोगस फर्मों का सहारा लिया जा रहा था। कागजों पर फर्जी खरीद–फरोख्त दिखाकर अवैध रकम को वैध बनाने का खेल चल रहा था, ताकि किसी भी जांच एजेंसी की नजर न पड़े।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अभियुक्तों ने अलग–अलग नामों से कई फर्जी कंपनियां और फर्में बना रखी थीं। इन फर्मों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक व्यापार मौजूद नहीं था। शुभम, दिवेश जायसवाल और विकास सिंह नरवे समेत सिंडीकेट से जुड़े अन्य लोग भी इस पूरे खेल में शामिल थे। हवाला के जरिए रकम को एक राज्य से दूसरे राज्य तक ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पैसों की असली पहचान छिपी रहे।
वाराणसी पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं और नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा है। बैंक खातों, जीएसटी दस्तावेजों और लेनदेन के रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। पुलिस का अनुमान है कि हवाला कारोबार की कुल रकम 34 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है और जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। फिलहाल तीनों गिरफ्तार अभियुक्तों से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस हवाला रैकेट से जुड़े अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
