2000 करोड़ के कफ सीरप तस्करी मामले में सरगना शुभम जायसवाल के खिलाफ कुर्की पूर्व उद्घोषणा जारी
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी। करीब 2000 करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के खिलाफ वाराणसी की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। गैर-जमानती वारंट के बावजूद अदालत में पेश न होने पर अपर सत्र न्यायाधीश ने उसके खिलाफ कुर्की पूर्व उद्घोषणा जारी करते हुए 27 अप्रैल 2026 तक न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है गंभीर मामला
यह मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस) के तहत दर्ज किया गया है, जो मादक पदार्थों के अवैध व्यापार के खिलाफ सख्त कानून माना जाता है। अदालत ने यह आदेश तब जारी किया जब 23 फरवरी को जारी गैर-जमानती वारंट के बावजूद आरोपी शुभम जायसवाल अदालत में पेश नहीं हुआ।
अदालत ने जारी की कुर्की पूर्व उद्घोषणा
अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी (14वां वित्त आयोग) मनोज कुमार द्वितीय की अदालत ने विवेचक एवं सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी के आवेदन पर सुनवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ कुर्की पूर्व उद्घोषणा जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि उद्घोषणा आरोपी के निवास स्थान पर चस्पा की जाए और सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाई जाए, ताकि उसे न्यायालय में उपस्थित होने की विधिवत सूचना मिल सके।
18 दिसंबर को दर्ज हुआ था मुकदमा
इस पूरे मामले की शुरुआत 18 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब औषधि निरीक्षक जुनाब अली ने सारनाथ क्षेत्र स्थित पीडी फार्मा के संचालक विष्णु पांडेय के खिलाफ कोडीनयुक्त कफ सीरप के गैर-चिकित्सीय उपयोग को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस की जांच के दौरान इस अवैध कारोबार के तार वाराणसी से बाहर कानपुर और प्रयागराज तक जुड़े पाए गए। विस्तृत छानबीन में शुभम जायसवाल को इस पूरे नेटवर्क का सरगना बताया गया, जबकि उसके पिता भोला प्रसाद सहित कई अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई।
अन्य सभी आरोपी गिरफ्तार, शुभम फरार
पुलिस ने इस मामले में शुभम जायसवाल को छोड़कर सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। 23 मार्च 2026 को पुलिस द्वारा अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया, जिससे उनके खिलाफ ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जांच में सामने आया है कि वह अपने परिवार के साथ दुबई फरार हो चुका है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
नियत तिथि तक पेश न होने पर होगी कुर्की
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी 27 अप्रैल 2026 तक न्यायालय में उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह कदम उसकी संपत्तियों को जब्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत बढ़ा दबाव
कुर्की पूर्व उद्घोषणा जारी होने के बाद अब आरोपी पर कानूनी दबाव और बढ़ गया है। यह प्रक्रिया आमतौर पर तब अपनाई जाती है जब कोई आरोपी लगातार फरार रहता है और अदालत के आदेशों की अवहेलना करता है।
पुलिस और न्यायालय की इस सख्ती से यह स्पष्ट संदेश गया है कि मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त आरोपियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में लाकर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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