वाराणसी: साइबर अपराधियों ने कानून का डर दिखाकर एक रिटायर्ड रेलकर्मी से 23 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया। जालसाजों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर पीड़ित को तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप में बैंक खाते से पूरी जमा रकम RTGS के जरिए ट्रांसफर करवा ली। मामले में पीड़ित के बेटे, छित्तूपुर मेडिकल कॉलोनी निवासी डॉक्टर चंदन किशोर की तहरीर पर सिगरा थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
डॉक्टर चंदन किशोर ने बताया कि उनके पिता रघुनंदन प्रसाद रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। 25 दिसंबर 2025 को उनके पिता के मोबाइल नंबर पर एक व्हाट्सऐप कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने कहा कि उनके आधार से जुड़े एक नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और इस मामले में मुंबई में एफआईआर दर्ज है। जालसाजों ने यह भी कहा कि जल्द ही एक अधिकारी उनसे बात करेंगे और उन्हें पुलिस के सामने अपना पक्ष रखने के लिए मुंबई आना होगा।
कुछ ही देर बाद पुलिस का लोगो लगे एक नंबर से वीडियो कॉल आई। वीडियो कॉल पर मौजूद व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए रघुनंदन प्रसाद को गंभीर धाराओं में जेल और भारी जुर्माने की धमकी दी। भय का माहौल बनाकर उनसे कहा गया कि जांच पूरी होने तक वे किसी से भी इस बारे में बातचीत न करें। यही नहीं, उन्हें 24 घंटे तक मानसिक दबाव में रखकर “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में रखा गया।
डॉक्टर चंदन किशोर के अनुसार, जब उनके पिता ने अपना नंबर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा न होने की बात कही तो जालसाजों ने लिखित बयान देने के बहाने मुंबई बुलाने की बात कही। वहां न जा पाने की मजबूरी का फायदा उठाकर आरोपियों ने जांच के नाम पर खाते में मौजूद पूरी रकम एक अन्य खाते में ट्रांसफर करने को कहा। 26 दिसंबर को दबाव में आकर रघुनंदन प्रसाद ने गुवाहाटी स्थित एक बैंक खाते में RTGS के जरिए 23 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
घटना की जानकारी मिलते ही डॉक्टर चंदन किशोर ने सबसे पहले ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। जब वहां से कोई त्वरित समाधान नहीं मिला तो उन्होंने सिगरा थाने में लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सिगरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा ने बताया कि तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 316(2) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला डिजिटल अरेस्ट के जरिए की गई सुनियोजित साइबर ठगी का है। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर ठग किस तरह कानून और पुलिस के नाम का दुरुपयोग कर आम लोगों, खासकर बुजुर्गों को डराकर उनकी जीवनभर की जमा पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या व्हाट्सऐप संदेश पर भरोसा न करें और इस तरह की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में दें।
