वाराणसी में “डिजिटल हाउस अरेस्ट” के नाम पर 10 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने पूरी रकम कराई होल्ड
वाराणसी में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अपराधियों ने “डिजिटल हाउस अरेस्ट” का भय दिखाकर एक व्यक्ति से 10 लाख रुपये ठग लिए। हालांकि, पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के चलते पूरी धनराशि को समय रहते होल्ड करा लिया गया, जिससे पीड़ित को बड़ी राहत मिली है।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाई साजिश
जानकारी के अनुसार, थाना शिवपुर क्षेत्र के निवासी जयप्रकाश सिंह को अज्ञात साइबर अपराधियों ने कॉल और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क किया। अपराधियों ने खुद को सरकारी एजेंसी से जुड़ा बताते हुए उन्हें “डिजिटल हाउस अरेस्ट” का डर दिखाया और कहा कि वे एक गंभीर मामले में फंस गए हैं। गिरफ्तारी से बचने के नाम पर उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई।
अपराधियों के दबाव और भय के कारण जयप्रकाश सिंह ने बताए गए खातों में 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया।
19 मार्च को दर्ज कराई शिकायत
पीड़ित ने 19 मार्च 2026 को थाना साइबर क्राइम वाराणसी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की और कार्रवाई शुरू कर दी।
विशेष टीम का गठन, बैंकों से समन्वय
पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तुरंत संबंधित बैंकों और साइबर अपराध समन्वय केंद्र से संपर्क स्थापित किया। त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी गई पूरी राशि, जो कि 10,00,000 रुपये थी, को होल्ड करा दिया गया।
राशि वापस कराने की प्रक्रिया शुरू
पुलिस ने न्यायालय के माध्यम से उक्त धनराशि को शिकायतकर्ता के पक्ष में रिलीज कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पीड़ित को उसकी पूरी रकम वापस मिल जाएगी।
पुलिस टीम की सक्रिय भूमिका
इस पूरे प्रकरण में साइबर क्राइम टीम की सक्रिय भूमिका रही। टीम में प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह (साइबर थाना), प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार तिवारी (साइबर क्राइम सेल), उप निरीक्षक आलोक रंजन सिंह, कांस्टेबल रोहित तिवारी, मुरारी कुमार (कार्यालय सहायक, पुलिस आयुक्त साइबर अपराध) सहित अन्य पुलिसकर्मी लगातार जुटे रहे।
पीड़ित ने दिया धन्यवाद पत्र
पुलिस की तत्पर कार्रवाई से संतुष्ट होकर पीड़ित जयप्रकाश सिंह ने साइबर क्राइम टीम को लिखित धन्यवाद पत्र सौंपा और उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो उनकी पूरी जमा पूंजी चली जाती।
क्या है “डिजिटल हाउस अरेस्ट” ठगी का तरीका
इस प्रकार की ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल के जरिए पीड़ित को डराते हैं। वे कहते हैं कि पीड़ित किसी अपराध में शामिल है और उसे “डिजिटल हाउस अरेस्ट” में रखा गया है। इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे ऐंठ लिए जाते हैं।
पुलिस की अपील, रहें सतर्क
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रकार के फर्जी कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज से सावधान रहें। किसी भी स्थिति में डर या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में सूचना दें।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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