गैस संकट के बीच वाराणसी में घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी नियमों की अनदेखी से बढ़ा खतरा
वाराणसी: शहर में इन दिनों एक ओर जहां रसोई गैस की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर आम लोग पहले से ही परेशान हैं वहीं दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और उनका व्यावसायिक उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। शहर के विभिन्न बाजारों गलियों और चौराहों पर लगे ठेले खोमचे अस्थायी भोजनालयों और छोटे ढाबों में घरेलू गैस सिलेंडर धड़ल्ले से इस्तेमाल होते दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल नियमों की खुली अवहेलना है बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल
नियमों के अनुसार होटल ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल व्यावसायिक गैस सिलेंडर का उपयोग किया जाना चाहिए लेकिन हकीकत यह है कि शहर के कई इलाकों में घरेलू सिलेंडर ही खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सुबह से देर रात तक चलने वाले चाट पकौड़ी फास्ट फूड और अन्य खाद्य पदार्थों के ठेलों पर लाल रंग के घरेलू सिलेंडर आसानी से देखे जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अचानक किसी सिलेंडर में लीकेज या विस्फोट की घटना हो जाए तो भीड़भाड़ वाले इन इलाकों में बड़ा हादसा हो सकता है।
पंजीकरण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
चिंताजनक बात यह भी है कि इन ठेलों और छोटे रेस्टोरेंटों का अधिकांशतः कोई पंजीकरण नहीं है। न तो इनके पास खाद्य सुरक्षा से जुड़ा लाइसेंस दिखाई देता है और न ही अग्नि सुरक्षा से संबंधित कोई प्रमाणपत्र। फायर विभाग से बिना अनुमति के संचालित हो रहे इन अस्थायी प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में गैस सिलेंडर के इस्तेमाल के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी समय बड़े खतरे का कारण बन सकती है।
खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में खाद्य विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। शहर में सैकड़ों की संख्या में ऐसे ठेले और छोटे भोजनालय संचालित हो रहे हैं लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की जाए तो घरेलू सिलेंडरों के इस अवैध उपयोग और कालाबाजारी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
नाबालिग बच्चों से काम कराने की शिकायतें
वहीं श्रम कानूनों की अनदेखी भी एक गंभीर पहलू बनकर सामने आ रही है। कई ढाबों और ठेलों पर नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। गर्म तवे और गैस चूल्हों के बीच काम करने वाले ये बच्चे न केवल खतरनाक माहौल में काम करने को मजबूर हैं बल्कि उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। इसके बावजूद श्रम विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई न होने से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
रामनगर क्षेत्र में भी सामने आ रही अवैध गतिविधियां
इस संबंध में रामनगर संवाददाता राजकुमार यादव ने बताया कि गंगा के इस पार रामनगर क्षेत्र में भी अवैध रूप से घरेलू गैस सिलेंडरों की रिफिलिंग किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। यहां कई छोटे बड़े प्रतिष्ठानों और ठेलों पर व्यावसायिक सिलेंडर की जगह घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। इतना ही नहीं कई स्थानों पर नाबालिग बच्चों से काम करवाने और उनके शोषण की शिकायतें भी सामने आ रही हैं जो कानून के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
गैस आपूर्ति और कीमतों का भी असर
उधर देश में समय समय पर गैस आपूर्ति और कीमतों को लेकर भी दबाव की स्थिति बनी रहती है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार चढ़ाव आयात लागत में वृद्धि और वितरण व्यवस्था पर बढ़ते बोझ का असर भी गैस की उपलब्धता पर पड़ता है। ऐसे समय में जब आम परिवार सिलेंडर की कीमत और उपलब्धता दोनों से जूझ रहे हैं तब घरेलू गैस का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है।
संयुक्त अभियान चलाने की उठी मांग
सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन खाद्य विभाग फायर विभाग और श्रम विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर जांच करें तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। साथ ही छोटे व्यवसायियों को भी नियमों के तहत व्यावसायिक गैस सिलेंडर और आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।
वाराणसी जैसे घनी आबादी वाले शहर में जहां रोजाना हजारों लोग बाजारों और गलियों से गुजरते हैं वहां नियमों की अनदेखी और लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग समय रहते सक्रिय हों और सख्त कार्रवाई कर व्यवस्था को दुरुस्त करें ताकि आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो।
LATEST NEWS