वाराणसी में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का उग्र प्रदर्शन, न्यायिक आदेश तक कार्रवाई रोकने की मांग
राजातालाब क्षेत्र में किसानों का फूटा आक्रोश
वाराणसी: राजातालाब थाना क्षेत्र स्थित शाहनशापुर और धानापुर लश्करिया गांवों में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश शुक्रवार को खुलकर सामने आया। ग्राम प्रधान चंद्रजीत यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कोऑपरेटिव परिसर के समीप धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक न्यायालय से अंतिम आदेश नहीं आ जाता, तब तक किसी भी प्रकार की अधिग्रहण या कब्जे की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए।
बिना सूचना अधिग्रहण का आरोप
हमारे संवाददाता शुभम शर्मा ने बताया कि, प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के उनकी कृषि भूमि पर जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से खेती करते आ रहे हैं, उसी पर अब पुलिस की मौजूदगी में सीमेंटेड पोल लगाए जा रहे हैं, जो उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
खतौनी से नाम हटाने पर सवाल
किसानों ने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया कि संबंधित भूमि उनके नाम खतौनी में दर्ज थी, लेकिन बिना किसी सूचना के उनके नाम हटा दिए गए। इसको लेकर ग्रामीणों ने प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यह मामला पहले से ही न्यायालय में लंबित है, ऐसे में प्रशासन की जल्दबाजी न्यायिक प्रक्रिया का अनादर है।
मामला न्यायालय में लंबित
जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण से जुड़ी रिट याचिका संख्या 26553/2023 उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसकी सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित थी, लेकिन सरकारी पक्ष द्वारा समय मांगे जाने के बाद अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। इसके अलावा, अपर आयुक्त प्रशासन के समक्ष अपील संख्या 2576/2024 भी लंबित बताई जा रही है।
एसडीएम से हस्तक्षेप की मांग
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने एसडीएम राजातालाब से मांग की कि न्यायालय के अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द संज्ञान नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि उनके जीवन और आजीविका से जुड़ा मुद्दा है।
पारदर्शिता और संवाद की जरूरत
यह घटनाक्रम एक बार फिर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, संवाद और संवेदनशीलता की आवश्यकता को उजागर करता है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन किसानों की चिंताओं को किस प्रकार संबोधित करता है और आगामी न्यायिक सुनवाई के बाद यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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