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वाराणसी: गंगा में अवैध नावों का जाल, 1217 लाइसेंस पर दौड़ रही 3000 से अधिक नावें

वाराणसी: गंगा में अवैध नावों का जाल, 1217 लाइसेंस पर दौड़ रही 3000 से अधिक नावें

वाराणसी में गंगा नदी में लाइसेंस से कहीं अधिक नावों का संचालन हो रहा है, जिससे प्रदूषण और बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया है।

वाराणसी: मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर इन दिनों आस्था के साथ-साथ अव्यवस्था का भी गहरा रंग चढ़ता जा रहा है। जिस गंगा में कभी सिर्फ लहरों की कलकल सुनाई देती थी, वहां अब डीजल इंजन का शोर और नाविकों की मनमानी गूंज रही है। काशी में शीत ऋतु के आगमन के साथ ही देश-विदेश से आने वाले सैलानियों और साइबेरियन पक्षियों की आमद बढ़ गई है, लेकिन इसी भीड़ की आड़ में गंगा के अंदर एक खतरनाक खेल चल रहा है।

नगर निगम और प्रशासन के तमाम दावों के विपरीत, गंगा की लहरों पर नावों का संचालन अब एक बेलगाम व्यवसाय बन चुका है, जहां नियमों को ताक पर रखकर हजारों जिंदगियों को खतरे में डाला जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो नगर निगम ने महज 1217 नावों को ही संचालन का लाइसेंस जारी किया है, लेकिन हकीकत में गंगा की छाती पर 3000 से ज्यादा नावें दौड़ रही हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि किसी बड़ी अनहोनी को भी न्योता दे रही है।

गंगा में बढ़ते प्रदूषण और अनियंत्रित ट्रैफिक ने अब खतरनाक रूप ले लिया है। पिछले एक साल के भीतर डीजल चालित नावों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और यह आंकड़ा 1500 को पार कर गया है। हैरानी की बात यह है कि एक ही लाइसेंस की आड़ में नाविक तीन-तीन, चार-चार नावों का संचालन कर रहे हैं। इस अवैध विस्तार पर लगाम कसने वाला कोई नहीं है। नौका विहार से होने वाली बंपर कमाई के लालच में गंगा में क्रूज और बड़ी नावें उतारने की होड़ मची हुई है। ठंड में जब घाटों और गंगा पार की रेती पर पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ती है और लोग पक्षियों को दाना खिलाने के लिए नौकायान का लुत्फ उठाते हैं, तब नाविकों की मनमानी अपने चरम पर होती है। सैलानियों से प्रशासन द्वारा तय किए गए रेट से कई गुना अधिक किराया वसूला जा रहा है, और विरोध करने पर अभद्रता की घटनाएं अब आम हो चली हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि गंगा में नावों की इस भीड़ और ओवरलोडिंग के कारण हादसों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। मान मंदिर घाट के पास हाल ही में हुई घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी थी, जब ओवरलोडिंग के कारण दो नावों की टक्कर में एक छोटी नाव पलट गई और 60 श्रद्धालु नदी में गिर गए थे। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह हादसा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी था। इसी तरह, नए साल के जश्न के दौरान भी सवारी बैठाने को लेकर नाविकों के बीच हुई हिंसक मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था, जिसने काशी की छवि को धूमिल किया। गंगा में नावों का ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि अब यह किसी भी दिन एक बड़े हादसे का रूप ले सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं।

सैलानियों की जेब पर डाका डालने के लिए नाविकों और होटल संचालकों के बीच एक संगठित 'कमीशन सिंडिकेट' काम कर रहा है। सामनेघाट से लेकर नमो घाट तक गंगा किनारे हजारों होटल और गेस्ट हाउस संचालित हैं, जो 'रिवर व्यू' के नाम पर पर्यटकों की पहली पसंद बनते हैं। जब इन होटलों में ठहरा पर्यटक नौकायान के लिए घाट पर पहुंचता है, तो नाविक उनसे मनमाना किराया वसूलते हैं। इस लूट की मुख्य वजह यह है कि नाविकों को किराए का एक मोटा हिस्सा उन होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को 'कमीशन' के तौर पर देना पड़ता है, जिन्होंने पर्यटक को भेजा है। लाखों सैलानी रोजाना काशी आते हैं, और परदे के पीछे चल रहे इस खेल में उनसे नियमों के विरुद्ध जाकर वसूली की जा रही है। हालांकि, जल पुलिस के प्रभारी निरीक्षक राज किशोर पांडेय का दावा है कि मनमानी वसूली की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है और रेट चार्ट को अपडेट करने की आवश्यकता है।

प्रशासन अब इस बेकाबू होती स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय होता दिख रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत बदलना अभी बाकी है। एआरटीओ (प्रवर्तन) मनोज वर्मा के अनुसार, नावों के लाइसेंस और संचालन को लेकर नाविकों के साथ लगातार बैठकें कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है।

प्रशासन ने शुक्रवार को लाइसेंस आवेदन के लिए पोर्टल खोल दिया है और नाविकों को अल्टीमेटम दिया गया है कि वे इसी महीने के अंत तक आवेदन कर दें। चेतावनी स्पष्ट है कि निर्धारित समय सीमा के बाद अवैध रूप से संचालित नावों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन 3000 नावों के इस जाल को तोड़कर गंगा में सुरक्षित और व्यवस्थित पर्यटन सुनिश्चित कर पाता है, या फिर आस्था की यह नदी अव्यवस्था के भंवर में ही फंसी रहेगी।

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