वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जयंती को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। एक फरवरी को होने वाले जन्मोत्सव में देश विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में पहुंचे सेवादार लंगर ठहराव और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आयोजन स्थल पर भक्ति और सेवा का माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
गुरु रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर में ट्रस्ट की ओर से पंडाल निर्माण का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को रहने और भोजन की समुचित सुविधा मिल सके। ट्रस्टी निरंजन चीमा के अनुसार देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और एनआरआई भक्तों के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। लंगर सेवा की शुरुआत हो चुकी है और बड़ी रसोइयों में प्रसाद निर्माण का कार्य लगातार चल रहा है।
बड़े लंगर के लिए पंजाब और हरियाणा से आए कारीगर मीठी बुनिया और मट्ठी सहित अन्य प्रसाद तैयार कर रहे हैं। ट्रकों के माध्यम से अनाज तेल घी और मसालों की आपूर्ति पहले ही कर दी गई है। वहीं हरी सब्जियां आसपास के रमना और बनपुरवां गांवों के किसानों से खेत सहित खरीदी गई हैं जिससे स्थानीय किसानों को भी लाभ मिला है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इससे गुणवत्ता भी बनी रहती है और किसानों को सीधा लाभ पहुंचता है।
श्रद्धालुओं के सत्संग के लिए जर्मन हैंगर पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मंदिर परिसर से लेकर पंडाल तक लगभग दो सौ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनमें से सौ कैमरे पहले से मंदिर प्रबंधन की ओर से स्थापित हैं। लंगर परिसर और रिहायशी पंडालों के प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर के जरिए जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए अस्थायी पुलिस चौकी का निर्माण किया गया है जहां सादे कपड़ों में तैनात सुरक्षाकर्मी भीड़ पर नजर रखेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जयंती के अवसर पर सीर गोवर्धनपुर एक बार फिर भक्ति सेवा और समरसता का केंद्र बनने जा रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आमद और व्यापक तैयारियों के बीच यह आयोजन सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देगा।
