वाराणसी में आकाशीय बिजली का कहर: खेत से लौटते समय दंपती की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम
अचानक बदले मौसम ने ली दो जिंदगियां, पूरे गांव में शोक की लहर
वाराणसी: जिले के सिंधोरा थाना क्षेत्र के भदेवली गांव में शुक्रवार को मौसम के अचानक बदले मिजाज ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। आकाशीय बिजली गिरने से एक दंपती की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम नजर आ रही है।
बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे दंपती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भदेवली गांव निवासी 58 वर्षीय रमेश चंद्र भारती और उनकी पत्नी 56 वर्षीय चमेला देवी शुक्रवार को अपने खेत में गेहूं की फसल का बोझ बांधने गए थे। दोपहर के समय अचानक मौसम बदल गया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए दोनों पास स्थित नटवा बीर बाबा मंदिर के समीप पहुंचे और एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए।
बिजली गिरते ही मौके पर मचा हड़कंप
इसी दौरान तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आकर दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने जैसे ही घटना देखी, तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना देर किए दोनों को नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल रेफर किया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
शिक्षक थे मृतक, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
बताया जा रहा है कि रमेश चंद्र भारती एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और अपने सरल व मिलनसार स्वभाव के कारण गांव में सम्मानित व्यक्ति माने जाते थे। उनके असामयिक निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरा गांव शोकाकुल है। परिवार में दो बेटे और तीन बेटियां हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
अचानक हुई घटना ने सबको झकझोरा
ग्रामीणों के अनुसार, यह घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। एक सामान्य दिन देखते ही देखते बड़ी त्रासदी में बदल गया। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में लोग हर बार इसका शिकार हो जाते हैं।
विशेषज्ञों ने दिए बचाव के महत्वपूर्ण सुझाव
मौसम और आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थान या पेड़ के नीचे खड़े होना सबसे खतरनाक होता है। ऐसे समय में तुरंत किसी पक्के भवन में शरण लेना चाहिए। यदि खेत या खुले इलाके में फंस जाएं तो जमीन के करीब झुककर बैठना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी कि बिजली कड़कने के दौरान मोबाइल फोन का सीमित उपयोग करें और धातु की वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
जागरूकता की कमी बन रही बड़ी वजह
यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति हमारी तैयारी और जागरूकता अभी भी पर्याप्त नहीं है। फिलहाल भदेवली गांव में शोक का माहौल है और हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि ऐसी त्रासदी दोबारा किसी परिवार के साथ न हो।
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