वाराणसी में रामनगर पुलिस का ऑपरेशन सीवाई वज्र सफल दो करोड़ से अधिक की साइबर ठगी करने वाले तीन शातिर गिरफ्तार
वाराणसी में कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऑपरेशन सीवाई वज्र के तहत अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से दो करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चार एंड्रायड मोबाइल फोन बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एक एटीएम डेबिट कार्ड तथा कुल चौबीस हजार आठ सौ अस्सी रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।
ऑपरेशन सीवाई वज्र के तहत हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन सीवाई वज्र के अंतर्गत पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देशन में की गई। अभियान का संचालन पुलिस उपायुक्त काशी जोन के निर्देशन अपर पुलिस उपायुक्त काशी जोन के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली के मार्गदर्शन में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्र के नेतृत्व में किया गया। पुलिस के अनुसार साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और म्यूल खातों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान इस गिरोह का खुलासा हुआ।
तकनीकी जांच से खुला साइबर नेटवर्क
पुलिस के अनुसार तेरह जुलाई दो हजार छब्बीस को म्यूल खातों के सत्यापन के दौरान एक संदिग्ध बैंक खाते से अवैध धन निकासी और धन के वितरण की जानकारी प्राप्त हुई। उप निरीक्षक अनिल राजपूत की तहरीर पर थाना रामनगर में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद साइबर सेल और सर्विलांस सेल की सहायता से बैंक खातों मोबाइल नंबरों तथा साइबर शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच के आधार पर उन्नीस जुलाई की रात लंका मैदान रामनगर क्षेत्र से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में सामने आया ठगी का तरीका
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के आधार पर लोगों के बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद पासबुक एटीएम कार्ड और ओटीपी सहित बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अपने कब्जे में लेकर खातों और यूपीआई का संचालन करते थे। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को अलग अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर नकद निकाल लिया जाता था और गिरोह के सदस्यों के बीच पहले से तय हिस्से के अनुसार रकम का बंटवारा किया जाता था। आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे विभिन्न राज्यों के बैंक खातों का उपयोग करते थे ताकि स्थानीय स्तर पर जांच एजेंसियों के लिए उन तक पहुंचना कठिन हो सके।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
पुलिस ने रामनगर वाराणसी निवासी रोहित मौर्या महाराष्ट्र के पालघर निवासी धीरेन्द्र लाल बहादुर पाल तथा बिहार के शेखपुरा निवासी सोनू कुमार उर्फ भोली को गिरफ्तार किया है। रोहित मौर्या के पास से एक एंड्रायड मोबाइल फोन और एक सौ दस रुपये नकद बरामद हुए। धीरेन्द्र लाल बहादुर पाल के पास से एक एंड्रायड मोबाइल फोन और तीन सौ बीस रुपये नकद मिले। वहीं सोनू कुमार उर्फ भोली के कब्जे से दो एंड्रायड मोबाइल फोन बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एक एटीएम डेबिट कार्ड तथा चौबीस हजार चार सौ पचास रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में दो करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़े प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका
इस सफल कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्र उप निरीक्षक बाल योगेश्वर गौड़ उप निरीक्षक जय प्रकाश सिंह उप निरीक्षक पंकज मिश्रा मुख्य आरक्षी रविन्द्र सिंह उप निरीक्षक नितेश शर्मा आरक्षी निलेश कुमार सिंह आरक्षी सचिन चतुर्वेदी आरक्षी राजन कुमार महिला आरक्षी कुमारी सौम्या तथा साइबर सेल और सर्विलांस सेल के आरक्षी अश्विनी सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टीम ने तकनीकी जांच और सतर्क निगरानी के माध्यम से पूरे नेटवर्क का पता लगाने में सफलता प्राप्त की।
पृष्ठभूमि और आगे की जांच
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधियों द्वारा म्यूल खातों का उपयोग कर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी प्रकार के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए ऑपरेशन सीवाई वज्र चलाया जा रहा है। कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस का कहना है कि इस मामले में अन्य बैंक खातों आर्थिक लेनदेन और गिरोह से जुड़े सहयोगियों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे संगठित गिरोहों के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
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