वाराणसी में कफ सिरप तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

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Dilip Kumar
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वाराणसी में कफ सिरप तस्करी गिरोह के पांच आरोपी पुलिस गिरफ्त में

राणसी कमिश्नरेट के काशी जोन अंतर्गत थाना कोतवाली पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने 25-25 हजार रुपये के 03 इनामिया अभियुक्तों सहित कुल 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न केवल वाराणसी बल्कि पूर्वांचल स्तर पर सक्रिय एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों, कूटरचित जीएसटी इनवाइस और ई वे बिल के सहारे करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला थाना कोतवाली पर पंजीकृत मुकदमा संख्या 235/2025 से जुड़ा हुआ है। इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा एनडीपीएस एक्ट की धारा 8, 21, 29 और 26डी के तहत अभियोग पंजीकृत है। इन धाराओं के तहत जहरीली दवाओं के अवैध क्रय विक्रय, आपराधिक षडयंत्र, नशे के पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देश पर जहरीली दवाओं के अवैध व्यापार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त काशी जोन के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त के पर्यवेक्षण में थाना कोतवाली पुलिस और एसआईटी टीम ने इस प्रकरण में फरार और वांछित अभियुक्तों की तलाश तेज की। लगातार तकनीकी निगरानी, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस को यह सफलता मिली।

जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने आपराधिक षडयंत्र के तहत कोडीन युक्त न्यू फेंसाडिल कफ सिरप की भारी मात्रा की तस्करी की। इस दवा का उपयोग औषधीय उपचार के बजाय नशे के लिए किया जा रहा था। आरोपियों ने शैली ट्रेडर्स रांची झारखंड समेत कई मेडिकल फर्मों के माध्यम से कागजों में दवाओं की खरीद बिक्री दिखाई, जबकि वास्तविकता में इन दवाओं को नशे के बाजार में खपाया गया। इसके लिए फर्जी और कूटरचित जीएसटी इनवाइस, ई वे बिल और अन्य दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि पूरे नेटवर्क की बैठकों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता था। इन बैठकों में यह तय किया जाता था कि किस फर्म के नाम पर माल मंगाना है, किस खाते में पैसा जमा कराना है और नकद लेनदेन किस तरह करना है। आरोपियों ने स्वीकार किया कि बैंक खातों में आरटीजीएस और अन्य माध्यमों से पैसा जमा कराया जाता था और फिर उसे अलग अलग फर्मों के जरिये घुमाकर वापस मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध धन को वैध दिखाना और जांच एजेंसियों से बचना था।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने लगभग पच्चीस लाख बोतल कफ सिरप की तस्करी की। हवाला नेटवर्क के माध्यम से करीब चालीस करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन किया गया, जिसमें से लगभग 08 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक लाभ अभियुक्तों द्वारा प्राप्त किया गया। तस्करी से जुड़ा कुछ माल पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा में भी पकड़ा गया था, जिसके संबंध में नोटिस जारी हुए थे। अभियुक्तों ने बताया कि इन नोटिसों का जवाब भी फर्जी ई वे बिल और कागजात तैयार कर दिया जाता था ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके।

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में अमित जायसवाल, दिवेश जायसवाल और अंकुश सिंह ऐसे आरोपी हैं जिन पर पहले से पच्चीस पच्चीस हजार रुपये का इनाम घोषित था। इनके अलावा अभिनव कुमार यादव और घनश्याम मौर्य को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी अभियुक्त वाराणसी के अलग अलग थाना क्षेत्रों के निवासी हैं और इनकी भूमिका तस्करी, फर्जी फर्म संचालन, दस्तावेज तैयार करने और अवैध धन के प्रबंधन में पाई गई है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छियालिस अदद विदेशी मुद्रा और जामा तलाशी में एक आई फोन बरामद किया है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की तकनीकी जांच की जा रही है, जिससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल गिरफ्तारी की शुरुआत है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

यह गिरफ्तारी दिनांक सात फरवरी दो हजार छब्बीस को शाम छह बजकर पैंतीस मिनट पर मिर्जापुर बाईपास स्थित भोरसर लिंक रोड से की गई। पुलिस के अनुसार अभियुक्त गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय से फरार थे और एक स्थान से दूसरे स्थान पर छिपकर रह रहे थे। एसआईटी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए सभी को एक साथ दबोच लिया।

इस पूरी कार्रवाई में थाना कोतवाली की एसआईटी टीम के साथ साथ सर्विलांस सेल और साइबर सेल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर विश्लेषण और बैंकिंग लेनदेन की जांच से इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलीं। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों से जुड़े लिंक और हवाला नेटवर्क पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एनडीपीएस एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत दर्ज ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। कफ सिरप जैसी दवाओं का नशे के रूप में उपयोग समाज और विशेषकर युवाओं के लिए गंभीर खतरा है। वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी नशीली दवाओं की अवैध बिक्री, संदिग्ध मेडिकल फर्म या असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। कानून के दायरे में रहकर काम करने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी, लेकिन जो लोग समाज को जहर परोसने का काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करती है, बल्कि युवाओं और समाज को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देती है।