वाराणसी: पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात शूटर बनारसी यादव ढेर, पूर्वांचल के अपराधियों में हड़कंप

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वाराणसी के बारियासनपुर रिंग रोड पर मुठभेड़ के बाद पुलिस कार्रवाई का दृश्य

वाराणसी: चौबेपुर/मंगलवार देर रात पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात शूटर और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश बनारसी यादव को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। लंबे समय से फरार चल रहा यह अपराधी पूर्वांचल के कई जिलों में कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ था। चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड पर हुई इस मुठभेड़ को पुलिस की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, देर रात एसटीएफ को पुख्ता सूचना मिली थी कि बनारसी यादव बारियासनपुर रिंग रोड के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर ली। पुलिस अधिकारियों ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कई बार चेतावनी दी, लेकिन उसने सरेंडर करने के बजाय पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोलियां उसे लगीं और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

घायल अवस्था में पुलिस उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ स्थल से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद हथियारों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किन-किन वारदातों में हुआ था और अपराध की अन्य कड़ियों को जोड़ा जा सके।

सारनाथ हत्याकांड का मुख्य आरोपी था बनारसी यादव

बनारसी यादव का नाम 21 अगस्त 2025 को हुए चर्चित सारनाथ हत्याकांड में प्रमुख रूप से सामने आया था। उस दिन सारनाथ थाना क्षेत्र स्थित अरिहंत नगर कॉलोनी फेज-2 में बाइक सवार तीन बदमाशों ने कॉलोनाइजर और प्रॉपर्टी कारोबारी महेंद्र गौतम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। इस सनसनीखेज हमले में महेंद्र गौतम की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिससे पूरे शहर में दहशत का माहौल बन गया था।

पुलिस जांच में सामने आया था कि हत्या की वजह करोड़ों रुपये की जमीन से जुड़ा विवाद था। महेंद्र गौतम की करीब 40 बिस्वा की कीमती जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसी विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गई और सुपारी देकर शूटरों को लगाया गया।

सुपारी किलिंग में अहम भूमिका, महीनों से था फरार

जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि इस हत्याकांड में बाहर से शूटर बुलाए गए थे, लेकिन पूरे घटनाक्रम में बनारसी यादव की भूमिका सबसे अहम थी। वारदात के समय उसके साथ अरविंद यादव उर्फ फौजी (कल्लू) और विशाल मौजूद थे। विशाल बाइक चला रहा था, जबकि बनारसी यादव और अरविंद यादव ने महेंद्र गौतम पर गोलियां चलाई थीं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस हत्या के लिए करीब पांच लाख रुपये की सुपारी दी गई थी।

घटना के बाद से ही बनारसी यादव लगातार फरार चल रहा था और अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस से बचता रहा। सोनभद्र, गाजीपुर और वाराणसी समेत कई जिलों की पुलिस टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई थीं। तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के जरिए उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

21 से अधिक मुकदमों का सामना कर रहा था इनामी बदमाश

गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट गांव का निवासी बनारसी यादव अपराध की दुनिया में एक पेशेवर सुपारी किलर के तौर पर जाना जाता था। उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी, अवैध वसूली और आर्म्स एक्ट समेत कुल 21 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

मुठभेड़ की सूचना मिलते ही मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंच गए और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस एनकाउंटर से पूर्वांचल में सक्रिय एक बड़े अपराधी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। साथ ही, बनारसी यादव से जुड़े पूरे गिरोह और उसके संपर्कों की जांच भी तेज कर दी गई है, ताकि बचे हुए आरोपियों तक जल्द पहुंचा जा सके।

पुलिस का दावा है कि बनारसी यादव के मारे जाने से क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों के हौसले कमजोर पड़ेंगे और लंबे समय से दहशत में जी रहे लोगों को राहत मिलेगी। प्रशासन ने साफ किया है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।