रामनगर(वाराणसी): काशी की विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला के बीच रविवार को उस समय अफरा तफरी मच गई जब पंचवटी मैदान में काशी नरेश के हाथियों में से एक अचानक बेकाबू हो गया। हाथी ने उसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे महावत छपालु पर हमला कर दिया। उसने महावत को अपनी सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और दांतों से भी गंभीर चोट पहुंचाई। हमले में घायल महावत को उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया जहां उनके शरीर पर करीब 50 टांके लगाए गए। घटना के बाद हाथी मैदान से निकलकर सड़क की ओर बढ़ने लगा जिससे आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस वन विभाग एनडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने में जुट गईं। सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रविवार को होने वाली रामनगर रामलीला की राम रावण युद्ध लीला स्थगित कर दी गई है। परंपरा के निर्वहन के लिए प्रतीकात्मक आरती की जाएगी।
सुबह साढ़े दस बजे हुई घटना, महावत पर हाथी ने किया हमला
जानकारी के मुताबिक आजमगढ़ निवासी महावत छपालु पिछले 13 वर्षों से काशी नरेश के हाथियों की देखभाल कर रहे हैं। रविवार सुबह वह रोजाना की तरह पंचवटी मैदान में हाथियों को नहलाने और भोजन देने की व्यवस्था में लगे थे। इसी दौरान सुबह करीब साढ़े दस बजे तीन हाथियों में से एक अचानक उग्र हो गया। महावत ने उसे शांत करने और काबू में करने की कोशिश की लेकिन हाथी ने उन पर हमला कर दिया। उसने छपालु को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और दांतों से शरीर के कई हिस्सों में चोट पहुंचाई। हमले के दौरान हाथी ने उन्हें पैरों से कुचलने की भी कोशिश की। अचानक हुए हमले के कारण मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।
घटना के बाद घायल महावत को तत्काल उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया जहां उन्हें करीब 50 टांके लगाए गए। छपालु के चाचा नौशाद के अनुसार पंचवटी इलाके में काशी नरेश डॉ. अनंत नारायण सिंह के तीन हाथी रखे जाते हैं। महावत पर हमला करने के बाद हाथी मैदान से निकलकर सड़क की ओर बढ़ने लगा। इससे आसपास के लोगों के बीच भय का माहौल बन गया और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा, लोगों से दूर रहने की अपील
हाथी के बेकाबू होने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया। एहतियात के तौर पर घटनास्थल के आसपास करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बनाए जाने और आने जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है। सहायक पुलिस आयुक्त लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार लोगों को घटनास्थल से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि हाथी की गतिविधियों के दौरान कोई व्यक्ति उसके नजदीक न पहुंचे और किसी अन्य के घायल होने की आशंका को टाला जा सके।
हाथी की गतिविधियों को देखते हुए रामनगर क्षेत्र की बिजली भी काटे जाने की जानकारी मिली है। पुलिस वन विभाग एनडीआरएफ और अन्य संबंधित कर्मियों समेत करीब 200 लोगों के नियंत्रण अभियान में जुटे होने की बात सामने आई है। मौके पर मौजूद टीमें हाथी की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसे सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने का प्रयास कर रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता हाथी को काबू में करने के साथ स्थानीय नागरिकों राहगीरों और सुरक्षा अभियान में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे घटनास्थल पर भीड़ न लगाएं और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश न करें।
गोरखपुर चिड़ियाघर से मंगाई गई जाइलाजीन दवा
बेकाबू हाथी को शांत करने के लिए गोरखपुर चिड़ियाघर से जाइलाजीन इंजेक्शन मंगाए जाने की जानकारी सामने आई है। चंदौली के प्रभागीय वन अधिकारी बी शिवशंकर ने बताया कि काशी वन्यजीव अभयारण्य में हाथी जैसे विशालकाय जानवर को नियंत्रित करने के लिए जरूरी विशेष व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक अभयारण्य में चीता बाघ और अन्य वन्यजीवों को जरूरत पड़ने पर पिंजरे में रखने की व्यवस्था हो सकती है लेकिन हाथी को नियंत्रित करना अलग तरह की चुनौती है।
जाइलाजीन का इस्तेमाल पशु चिकित्सा में बड़े जानवरों को शांत करने के लिए किया जाता है। हालांकि हाथी के आकार व्यवहार और मौके की परिस्थितियों को देखते हुए ऐसी दवा का उपयोग विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में सावधानीपूर्वक किया जाना आवश्यक है। इस तरह की कार्रवाई में जानवर की स्थिति का आकलन और उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल हाथी को नियंत्रित करने के प्रयासों में जुटी टीमों के सामने चुनौती यह है कि आम लोगों को सुरक्षित रखते हुए स्थिति को सामान्य किया जाए। दवा के इस्तेमाल और अभियान के नतीजे को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारियों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला पर असर, राम रावण युद्ध की लीला स्थगित
हाथी के उत्पात का असर रामनगर की करीब दो सौ वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला पर भी पड़ा है। रविवार को पंचवटी मैदान में भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का प्रसंग मंचित होना था। लेकिन हाथी के बेकाबू होने और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था लागू किए जाने के कारण आज की लीला स्थगित कर दी गई है। आयोजन की परंपरा को बनाए रखने के लिए प्रतीकात्मक आरती की जाएगी। इस निर्णय के बाद रविवार को राम रावण युद्ध का पारंपरिक मंचन नहीं हो सकेगा।
रामनगर की रामलीला अपनी विशिष्ट मंचन शैली धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए देशभर में जानी जाती है। यहां रामलीला का आयोजन पारंपरिक व्यवस्था के तहत किया जाता है और अलग अलग प्रसंगों के मंचन के लिए निर्धारित स्थानों का विशेष महत्व है। रामलीला से जुड़े कलाकारों और अन्य लोगों की गतिविधियां भी पंचवटी क्षेत्र से जुड़ी रहती हैं। काशी नरेश डॉ. अनंत नारायण सिंह के बेटे भी इसी हाथी पर सवार होकर रामलीला देखने पहुंचते हैं। ऐसे में हाथी के अचानक उग्र हो जाने की घटना ने आयोजन से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों के सामने सुरक्षा की चुनौती खड़ी कर दी।
स्थानीय स्तर पर पहले शाम सात बजे तक लीला शुरू होने की संभावना को लेकर इंतजार किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए अब राम रावण युद्ध की लीला स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। इसके स्थान पर प्रतीकात्मक आरती की जाएगी। धार्मिक परंपरा के निर्वहन के साथ लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया है। घटना के कारण रामलीला के महत्वपूर्ण प्रसंग का पारंपरिक मंचन प्रभावित हुआ है और स्थानीय लोगों के बीच हाथी को नियंत्रित किए जाने को लेकर चिंता बनी हुई है।
हाथी के उग्र होने की वजह स्पष्ट नहीं, प्रशासन की प्राथमिकता सुरक्षा
रामनगर में हुई इस घटना के बाद हाथी के अचानक उग्र होने के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इसकी कोई निश्चित आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। ऐसे में किसी विशेष कारण को हमले के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। हाथी के व्यवहार और उसकी स्थिति का आकलन विशेषज्ञों की मदद से किया जाना जरूरी है। घटना के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की जांच और पुष्टि के बाद ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल पुलिस वन विभाग एनडीआरएफ और अन्य संबंधित टीमें हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी हैं। प्रशासन के सामने एक ओर हाथी को काबू में करने की चुनौती है तो दूसरी ओर आसपास रहने वाले लोगों राहगीरों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग के जरिए लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे संयम बरतें घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाएं और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
महावत छपालु के घायल होने और सुरक्षा कारणों से राम रावण युद्ध लीला स्थगित किए जाने के बाद पूरे रामनगर की नजरें हाथी को नियंत्रित करने के प्रयासों पर टिकी हैं। इस घटना ने जहां स्थानीय लोगों में दहशत पैदा की है वहीं ऐतिहासिक रामलीला की व्यवस्थाओं को भी प्रभावित किया है। फिलहाल घायल महावत का उपचार और आम लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किए जाने और क्षेत्र में हालात सामान्य होने के बाद ही आगे की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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