वाराणसी में सजेगा ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ का भव्य मंच, तीन दिन जीवंत होगा स्वर्णिम इतिहास
विक्रमोत्सव 2026 के तहत काशी में भव्य सांस्कृतिक आयोजन
वाराणसी: भारतीय संस्कृति, इतिहास और परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन होने जा रहा है। 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित होने वाला “सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य” दर्शकों को प्राचीन भारत की गौरवशाली विरासत से रूबरू कराएगा। यह आयोजन न केवल एक नाट्य प्रस्तुति होगा, बल्कि भारतीय इतिहास की जीवंत अनुभूति प्रदान करेगा।
भव्य मंचन और 200 से अधिक कलाकारों की भागीदारी
बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आयोजित इस महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। मंचन को यथार्थपरक और आकर्षक बनाने के लिए हाथी, घोड़े, ऊंट, रथ और पालकियों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही आधुनिक लाइट और साउंड तकनीक, आतिशबाजी और नृत्य प्रस्तुतियां इस आयोजन को और भी भव्य बनाएंगी, जिससे दर्शकों को प्राचीन राजदरबार और युद्ध दृश्यों का सजीव अनुभव मिल सके।
सम्राट विक्रमादित्य के जीवन की गाथा होगी प्रस्तुत
यह महानाट्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना पर आधारित है। इसमें सम्राट विक्रमादित्य के जीवन की प्रमुख घटनाओं को मंचित किया जाएगा। प्रस्तुति में उनके जन्म से लेकर राजतिलक तक की यात्रा, न्यायप्रिय शासन, विक्रम-बेताल की कथाएं और सनातन धर्म के उत्थान की झलक देखने को मिलेगी। इसके साथ ही बाबा महाकाल की भस्म आरती का दृश्य भी विशेष आकर्षण रहेगा।
वैदिक घड़ी समर्पण की अनूठी पहल
इस आयोजन के दौरान भारतीय काल गणना की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। वाराणसी में पहली बार बाबा विश्वनाथ को वैदिक घड़ी समर्पित की जाएगी, जो पारंपरिक समय गणना को आधुनिक डिजिटल तकनीक के साथ प्रस्तुत करेगी। यह पहल भारतीय वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे सहभागिता
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे 3 अप्रैल की शाम बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में महानाट्य का अवलोकन करेंगे। इसके अगले दिन 4 अप्रैल को वे बाबा कालभैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी करेंगे। आयोजन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।
मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद
सांस्कृतिक आयोजन के साथ ही यहां फूड कोर्ट में मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का विशेष आकर्षण रहेगा। इसमें इंदौर का पोहा-जलेबी, मक्के का कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी का उड़द दाल और कोदो भात, कुटकी की खीर, बघेलखंडी निमोना-पुड़ी और बेड़ई पुड़ी जैसे व्यंजन शामिल होंगे।
पेय पदार्थ और मिष्ठान भी रहेंगे आकर्षण का केंद्र
आगंतुकों के लिए पेय पदार्थों में बुंदेलखंडी सन्नाटा छाछ, लेमन पुदीना, आम पना, सब्जा शिकंजी और गुलाब मलाई लस्सी उपलब्ध रहेगी। वहीं मावा बाटी जैसे पारंपरिक मिष्ठान भी लोगों को मध्य प्रदेश की समृद्ध खानपान परंपरा से परिचित कराएंगे।
संस्कृति और इतिहास का जीवंत उत्सव
समग्र रूप से यह आयोजन केवल एक नाट्य मंचन नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपरा का एक जीवंत उत्सव है। काशी की पवित्र भूमि पर आयोजित यह भव्य कार्यक्रम देशभर के लोगों को एक नई सांस्कृतिक अनुभूति प्रदान करेगा और भारतीय गौरव की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।
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