वाराणसी में महाशिवरात्रि पर शिवाला घाट पर दो दिवसीय रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जप का आयोजन
वाराणसी में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था साधना और सेवा का संगम देखने को मिला जब निशामिका सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में शिवाला घाट की पवित्र भूमि पर दो दिवसीय रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जप का आयोजन पूरे वैदिक विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। गंगा तट पर गूंजते मंत्रोच्चार धूप दीप की सुगंध और हर हर महादेव के उद्घोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। साधना में लीन साधक भाव विभोर श्रद्धालु और सेवा में तत्पर स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने आयोजन को अनुशासित और सुव्यवस्थित रूप दिया। समापन पर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया जहां सेवा की परंपरा ने भक्तिभाव को और सशक्त बनाया।
पृष्ठभूमि और आयोजन का उद्देश्य
निशामिका सेवा ट्रस्ट द्वारा महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह अनुष्ठान केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं रहा बल्कि समाज में सेवा और संवेदना के भाव को मजबूत करने का प्रयास रहा। वाराणसी के शिवाला घाट पर वैदिक परंपराओं के अनुरूप रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जप कराया गया जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ साथ आसपास के क्षेत्रों से आए भक्तों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य परंपरा के संरक्षण के साथ लोककल्याण की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
परिव्राजक श्री कैलाश नाथ अघोरी का सान्निध्य
इस अनुष्ठान का सान्निध्य परिव्राजक श्री कैलाश नाथ अघोरी उर्फ गूगल बाबा को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि और साधना का पर्व है और रुद्राभिषेक तथा महामृत्युंजय जप साधक को भीतर से दृढ़ बनाते हैं। उनके अनुसार नियमित जप और साधना से भय का क्षय होता है और जीवन में संतुलन साहस तथा करुणा का विकास होता है। उनके विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
अन्य संतों की उपस्थिति और संदेश
कार्यक्रम में काली नाथ अघोरी अन्नदा मां और श्री दिव्यानंद गिरि जी महाराज की उपस्थिति रही। अन्नदा मां ने कहा कि शिव साधना का अर्थ केवल पूजा विधि नहीं बल्कि सेवा की चेतना को जागृत करना है। उन्होंने समाज में अन्न और जल सेवा के महत्व पर बल दिया। श्री दिव्यानंद गिरि जी महाराज ने महामृत्युंजय जप को आत्मबल जागृत करने का मार्ग बताते हुए कहा कि साधना जब लोककल्याण से जुड़ती है तब उसका प्रभाव व्यापक होता है।
आयोजकों का वक्तव्य
निशामिका सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि यह आयोजन श्रद्धा के साथ सेवा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य परंपरा को जीवित रखते हुए समाज में सहयोग और संवेदना की भावना को सुदृढ़ करना है। शिवाला घाट पर आयोजित इस अनुष्ठान से श्रद्धालुओं को आत्मिक ऊर्जा मिली और सेवा गतिविधियों के माध्यम से समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाई गई। उन्होंने सभी सदस्यों और स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की।
व्यवस्था और सहभागिता
आयोजन में निशामिका सेवा ट्रस्ट के संचालक उमेश श्रीवास्तव उपाध्यक्ष श्रीमती हेमलता श्रीवास्तव प्रबंधक निरुपमा सिंह मीडिया प्रभारी हिमांशु श्रीवास्तव सहित सदस्य राजेश श्रीवास्तव राजेन्द्र श्रीवास्तव पंकज श्रीवास्तव संध्या श्रीवास्तव सावन पांडेय कृष्णा श्रीवास्तव अंशिका और परी की सक्रिय सहभागिता रही। स्वयंसेवकों ने अनुशासन और विनम्रता के साथ व्यवस्थाओं को संभाला जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
समापन और सामाजिक संदेश
गंगा तट पर संपन्न इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आस्था तब सार्थक होती है जब वह सेवा से जुड़ती है। मंत्रों की लय के साथ श्रद्धालुओं का भावात्मक जुड़ाव देखने को मिला। महाशिवरात्रि की यह साधना यात्रा आध्यात्मिक उन्नयन के साथ समाज में करुणा सहयोग और सद्भाव के भाव को प्रोत्साहित करने वाली रही।
