महाशिवरात्रि पर डिजिटल भक्ति का नया रिकॉर्ड, यूपीआई से दान में तेज बढ़ोतरी
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर डिजिटल माध्यम से श्रद्धालुओं की भागीदारी ने नया रिकॉर्ड बनाया। रविवार को महज 18 घंटों के भीतर 400 श्रद्धालुओं ने यूपीआई के जरिए बाबा विश्वनाथ को विवाह का नेग अर्पित किया। एक ही दिन में ऑनलाइन चढ़ावे की यह राशि बीते सात दिनों के कुल वर्चुअल दान से अधिक रही। रात होने से पहले ही करीब पांच लाख रुपये श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के खाते में पहुंच चुके थे। इस दौरान न्यूनतम एक रुपये से लेकर अधिकतम 50,001 रुपये तक के भुगतान दर्ज किए गए, जबकि औसतन प्रति श्रद्धालु योगदान करीब 1,200 रुपये रहा। यह रुझान तकनीक पर बढ़ते भरोसे के साथ आस्था के डिजिटल स्वरूप को मजबूती देने की ओर संकेत करता है।
वाराणसी में श्रद्धालुओं की ऑनलाइन सहभागिता में निरंतर बढ़ोतरी
महाशिवरात्रि से पहले के दिनों में भी डिजिटल माध्यम से दान की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती रही। छह फरवरी को 47 श्रद्धालुओं ने यूपीआई से दान किया, सात फरवरी को 36, आठ फरवरी को 33, नौ फरवरी को 75, 10 फरवरी को 29, 11 फरवरी को 37, 13 फरवरी को 65 और 14 फरवरी को 92 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन चढ़ावा भेजा। इन आंकड़ों से साफ है कि मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑनलाइन दान सुविधा पर भक्तों का भरोसा बढ़ रहा है और देश-विदेश से लोग बिना शारीरिक उपस्थिति के भी अपनी आस्था व्यक्त कर पा रहे हैं।
पृष्ठभूमि: फरवरी के पहले पखवाड़े में दान का रुझान
फरवरी महीने के पहले 15 दिनों में कुल मिलाकर करीब 1,200 श्रद्धालुओं ने यूपीआई के जरिए बाबा विश्वनाथ को लगभग 13 लाख रुपये का दान भेजा। इस अवधि में अधिकतम दान 10,001 रुपये और न्यूनतम एक रुपये दर्ज किया गया, जबकि औसत योगदान करीब 1,092 रुपये रहा। यदि महाशिवरात्रि के असाधारण आंकड़ों को अलग कर दिया जाए, तो शेष 14 दिनों में 800 श्रद्धालुओं ने करीब आठ लाख रुपये का ऑनलाइन दान किया। इन दिनों में प्रति श्रद्धालु औसत दान लगभग 1,000 रुपये के आसपास रहा, जो सामान्य दिनों की तुलना में स्थिर रुझान को दर्शाता है।
डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता और सुविधा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यूपीआई आधारित भुगतान व्यवस्था ने श्रद्धालुओं के लिए दान की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ पारदर्शिता भी बढ़ाई है। बदलते समय के साथ आस्था के तरीकों में यह परिवर्तन दिखाता है कि परंपरा और तकनीक साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं। अब श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित हुए बिना भी पूजा-अर्चना और नेग अर्पण कर पा रहे हैं, जिससे धार्मिक सहभागिता का दायरा व्यापक हुआ है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण
प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से प्राप्त दान का लेखा-जोखा व्यवस्थित रूप से दर्ज होता है, जिससे मंदिर के विभिन्न धार्मिक और जनसेवा कार्यों की योजना बनाना अधिक सुगम हुआ है। ऑनलाइन व्यवस्था से देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों में रह रहे श्रद्धालुओं को भी बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर मिल रहा है। इस पहल से धार्मिक संस्थानों में आधुनिक भुगतान प्रणालियों के प्रति भरोसा और स्वीकार्यता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
मंदिर और ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ी आधिकारिक जानकारियां और दान से संबंधित सूचनाएं मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती हैं। श्रद्धालु अधिकृत स्रोत से ही जानकारी लेने की अपील की जाती है। आधिकारिक जानकारी के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट देखी जा सकती है।
