काशी विश्वनाथ मंदिर: SDM पर बदसलूकी का आरोप, FIR दर्ज
काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में रविवार को एक बार फिर विवाद की गंभीर घटना सामने आई है जहां मंदिर के एक अधिकारी पर श्रद्धालुओं के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लगा है। विवाद के केंद्र में दक्षिणी मजिस्ट्रेट और एसडीएम शंभू शरण का नाम है जिन पर बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर भक्तों के साथ धक्का मुक्की करने का आरोप लगाया गया है। घटना मंदिर के भीतर उस समय हुई जब नियमित दर्शनार्थी दर्शन के लिए पहुंचे थे और वहां मौजूद सुरक्षा कर्मी और अधिकारी स्थिति को नियंत्रित कर रहे थे।
घटना का विवरण
भदैनी निवासी अनुज पांडे तथा फुलवरिया के बाबूलाल सोनकर ने चौक थाने में तहरीर देकर बताया है कि वे नियमित रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि रविवार को जब वे मंदिर में प्रवेश कर रहे थे तो करीब दस बाउंसरों के साथ एसडीएम शंभू शरण वहां उपस्थित थे। आरोप है कि एसडीएम और उनके सुरक्षा सहयोगी भक्तों से अभद्रता कर रहे थे तथा धक्का मुक्की कर रहे थे जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही थी। इन दोनों श्रद्धालुओं ने बताया कि वे आम शांतिपूर्ण दर्शन कर रहे थे परंतु अचानक से अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा।
दोनों पीड़ितों ने मौके पर मौजूद जिला मजिस्ट्रेट तथा कमिश्नर से मौखिक शिकायत की तथा बाद में चौक थाने में लिखित तहरीर भिजवाई जिसमें उन्होंने एसडीएम तथा उनके साथ मौजूद सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर एक पवित्र स्थल है और इस तरह का कृत्य अस्वीकार्य है जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
मंदिर प्रशासन का पक्ष
मंदिर प्रशासन ने इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए बताया कि घटना के समय अनुज पांडे तथा बाबूलाल सोनकर ने मंदिर के पश्चिमी द्वार को अवरुद्ध कर रखा था जो दर्शनार्थियों के निकास का मार्ग है। प्रशासन के अनुसार इन लोगों ने रेलिंग फांदकर जबरन गर्भगृह में प्रवेश करने का प्रयास किया तथा वहां अव्यवस्था फैलाने का प्रयास किया। स्थिति को संभालने के लिए वहां मौजूद सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि जबप ज़बरदस्ती प्रवेश का प्रयास किया जा रहा था तथा अव्यवस्था फैलाने की कोशिश हो रही थी तब सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया था। प्रशासन ने कहा कि इन लोगों ने सीआरपीएफ कर्मियों को गाली गलौज भी की जिस कारण आवश्यकतानुसार उन्हें गर्भगृह के पास से हटाया गया। मंदिर प्रशासन ने यह भी बताया कि घटना की पूरी सीसीटीवी फुटेज उनके पास सुरक्षित है जिसे जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
विरोध की यह घटना स्थानीय लोगों तथा अन्य श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई श्रद्धालुओं ने यह बयान दिया है कि काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है और यहां इस प्रकार का व्यवहार सहन नहीं किया जा सकता। कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें मंदिर में सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल की अपेक्षा है जहां वे बिना किसी डर के दर्शन कर सकें।
स्थानीय व्यापारियों तथा निवासियों ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि इस प्रकार की विवादास्पद स्थिति न केवल मंदिर की पवित्रता को प्रभावित करती है बल्कि वाराणसी की सामाजिक तथा सांस्कृतिक छवि को भी प्रभावित कर सकती है। कई लोगों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
चौक थाने में दर्ज तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जा रही है तथा सभी पक्षों से बयान लिए जा रहे हैं। घटना स्थल पर मौजूद सीआरपीएफ के जवानों तथा मंदिर कर्मचारियों के बयान भी लिए जा रहे हैं ताकि स्थिति की वस्तुनिष्ठ जांच हो सके।
पुलिस ने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने के पश्चात ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि किसी भी कानून उल्लंघन का मामला है या नहीं तथा यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो उचित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद रखते हैं और चाहते हैं कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में मंदिर परिसर में किसी भी श्रद्धालु के साथ इस तरह का व्यवहार न हो।
यह विवादात्मक घटना काशी विश्वनाथ मंदिर के सुरक्षा प्रबंधन तथा समय समय पर श्रद्धालुओं एवं अधिकारियों के बीच होने वाले मतभेदों की एक बार फिर याद दिलाती है। सभी पक्ष अब निष्पक्ष जांच और न्याय की प्राप्ति के लिए प्रशासनिक तथा पुलिस विश्वास पर नजर रखे हुए हैं ताकि सत्यतथ्य सामने आएं और भविष्य में ऐसे किसी भी विवाद को रोका जा सके।
