वाराणसी में शिवपुर थाने से जुड़े मामले में प्रेमचंद्र सोनकर उर्फ भजन को जमानत
वाराणसी। शिवपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले में अदालत ने आरोपी प्रेमचंद्र सोनकर उर्फ भजन सोनकर को जमानत दे दी है। सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट एफटीसी चौदहवां वित्त आयोग की अदालत ने मामले से संबंधित पत्रावली और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया। न्यायालय के आदेश के अनुसार आरोपी को पच्चीस हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की दो जमानतें प्रस्तुत करनी होंगी। यह आदेश शिवपुर थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 440 वर्ष 2026 से संबंधित है।
भारतीय न्याय संहिता की इन धाराओं में दर्ज था मुकदमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेमचंद्र सोनकर उर्फ भजन सोनकर के विरुद्ध शिवपुर थाने में दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 की उपधारा दो, धारा 352 और धारा 351 की उपधारा तीन के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। इसी मामले में आरोपी की ओर से अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को राहत दिए जाने के समर्थन में अपनी दलीलें रखीं। अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद जमानत के संबंध में निर्णय सुनाया।
बचाव पक्ष ने निर्दोष होने का दिया तर्क
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत सोनकर और अधिवक्ता कृष्णा सोनकर ने जमानत प्रार्थना पत्र पर पैरवी की। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने मामले से जुड़ी परिस्थितियों और न्यायहित का हवाला देते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने का अनुरोध किया। बचाव पक्ष ने अपनी दलीलों के माध्यम से अदालत से आग्रह किया कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत प्रदान की जाए।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का किया विरोध
सुनवाई के दौरान सहायक अभियोजन अधिकारी ने आरोपी की जमानत अर्जी का विरोध किया। अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप अजमानतीय अपराधों से संबंधित हैं और इस आधार पर उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली में उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने मामले की प्रकृति तथा समग्र परिस्थितियों पर विचार किया। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को निर्धारित शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
पच्चीस हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई का आदेश
न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रेमचंद्र सोनकर उर्फ भजन सोनकर को पच्चीस हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की दो प्रतिभूतियां प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाएगा। आदेश में निर्धारित बंधपत्र और जमानत संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करना आवश्यक है। अदालत से जमानत मंजूर होने के बाद आरोपी की रिहाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक औपचारिकताओं के पूरा होने पर निर्भर करेगी।
जमानत आदेश का कानूनी महत्व
आपराधिक मामलों में जमानत का निर्णय सुनवाई के दौरान उपलब्ध तथ्यों, आरोपों की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। किसी आरोपी को जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं होता कि उसके विरुद्ध दर्ज आरोप समाप्त हो गए हैं या उसे दोषमुक्त घोषित कर दिया गया है। मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों पर कानून के अनुसार विचार किया जाता है। इस प्रकरण में भी अदालत ने आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश दिया है।
शिवपुर थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 440 वर्ष 2026 में जमानत मंजूर होने के बाद अब आरोपी की रिहाई के लिए न्यायालय की ओर से निर्धारित औपचारिकताओं का पालन आवश्यक होगा। मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत सोनकर और अधिवक्ता कृष्णा सोनकर ने पैरवी की, जबकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी को निर्धारित बंधपत्र और जमानतें प्रस्तुत करने की शर्त पर राहत प्रदान की गई है।
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