वाराणसी में बड़ी मोटर बोट के संचालन को मिली अनुमति हाथ से चलने वाली नावों पर रोक जारी
वाराणसी। गंगा का जलस्तर घटने और परिस्थितियों में सुधार के बाद वाराणसी में शुक्रवार 9 अक्टूबर से बड़ी मोटर बोट के संचालन की अनुमति दे दी गई है। हालांकि सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए हाथ से चलने वाली नावों के संचालन पर प्रतिबंध अभी जारी रहेगा। प्रशासन ने मोटर बोट के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत नाव चलाने का समय निर्धारित करने के साथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई अनिवार्य शर्तें लागू की गई हैं। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि गंगा में नौका संचालन के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न हो।
सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक ही चलेंगी मोटर बोट
एसीपी दशाश्वमेध डॉ अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि बड़ी मोटर बोट का संचालन सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक ही किया जा सकेगा। निर्धारित समय सीमा के बाद नाव चलाने की अनुमति नहीं होगी। सभी मोटर बोट संचालकों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा। यदि कोई नाव संचालक तय समय सीमा का उल्लंघन करता है या सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने नाव संचालकों को स्पष्ट कर दिया है कि संचालन की अनुमति मिलने का अर्थ नियमों में किसी तरह की छूट मिलना नहीं है। प्रत्येक नाव पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना संचालक की जिम्मेदारी होगी।
हर मोटर बोट पर दो तैराक नाविकों की मौजूदगी अनिवार्य
गंगा में नौका विहार के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने प्रत्येक बड़ी मोटर बोट पर दो तैराक नाविकों की मौजूदगी अनिवार्य की है। इसके साथ ही नाव पर सवार सभी श्रद्धालुओं और यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनना होगा। बिना लाइफ जैकेट किसी भी यात्री को मोटर बोट पर बैठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था संभावित दुर्घटनाओं के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लागू की गई है। नाव संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी यात्रियों के पास लाइफ जैकेट हो और वे उसका इस्तेमाल कर रहे हों। सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनका सही तरीके से उपयोग नौका संचालन की महत्वपूर्ण शर्त होगी।
मोटर बोट की निर्धारित क्षमता से आधे यात्री ही बैठ सकेंगे
प्रशासन ने मोटर बोट में यात्रियों की संख्या को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। निर्धारित क्षमता के मुकाबले केवल आधे यात्रियों को ही बैठाने की अनुमति होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य नाव पर अधिक भार होने की आशंका को कम करना और किसी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक मोटर बोट में रस्सा और लाइफ बॉय सहित पर्याप्त सुरक्षा उपकरण रखना अनिवार्य किया गया है। नाव संचालकों को इन निर्देशों का पालन करते हुए ही संचालन करना होगा। यात्रियों की संख्या सीमित रखने और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता से गंगा में नौका विहार के दौरान जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
जलस्तर बढ़ने या मौसम खराब होने पर दोबारा लग सकती है रोक
एसीपी दशाश्वमेध डॉ अतुल अंजान त्रिपाठी के अनुसार खराब मौसम और गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण पहले नाव संचालन पर रोक लगाई गई थी। अब जलस्तर में कमी आने और परिस्थितियों में सुधार होने के बाद बड़ी मोटर बोट के संचालन की अनुमति दी गई है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह अनुमति सुरक्षा मानकों के पालन की शर्त पर दी गई है। मौसम की स्थिति बिगड़ने या गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने पर नौका संचालन को लेकर फिर से निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे में नाव संचालकों को प्रशासन के निर्देशों और परिस्थितियों पर ध्यान देना होगा।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता
वाराणसी के गंगा घाटों पर नौका विहार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में नाव संचालन की अनुमति बहाल होने के साथ सुरक्षा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रशासन ने बड़ी मोटर बोट के संचालन की अनुमति देते हुए समय सीमा निर्धारित की है और यात्रियों की संख्या सीमित रखने के साथ लाइफ जैकेट तथा अन्य सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्यता पर जोर दिया है। हाथ से चलने वाली नावों पर रोक फिलहाल जारी रहने से स्पष्ट है कि नौका संचालन को लेकर सभी गतिविधियां सामान्य नहीं हुई हैं। यात्रियों और नाव संचालकों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा। गंगा के जलस्तर और मौसम की स्थिति के अनुसार आगे की व्यवस्था तय की जाएगी।
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