वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस में प्रशिक्षणाधीन महिला आरक्षियों को आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से सशक्त बनाने के उद्देश्य से पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल द्वारा आरटीसी पुलिस लाइन वाराणसी में एक विशेष प्रशिक्षण क्लास का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में महिला प्रशिक्षुओं को प्रमुख और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक तकनीकी संसाधनों के उपयोग और आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
पुलिस आयुक्त ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि एयरपोर्ट, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, रेलवे स्टेशन, ताज होटल, रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर जैसे प्रमुख प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में सतर्कता और अनुशासन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने महिला प्रशिक्षुओं को समझाया कि इन स्थानों पर ड्यूटी के दौरान सजग दृष्टि, जिम्मेदार व्यवहार और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आवश्यक है। सुरक्षा में छोटी सी चूक भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है, इसलिए प्रत्येक ड्यूटी को पूर्ण गंभीरता से निभाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण सत्र में पुलिस आयुक्त ने HHMD यानी हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर और DFMD यानी डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर के प्रयोग की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रवेश द्वारों पर DFMD के माध्यम से प्रभावी जांच व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच के दौरान HHMD का सही और सुरक्षित उपयोग कैसे किया जाए। महिला प्रशिक्षुओं को आधुनिक उपकरणों के प्रयोग में दक्ष बनने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
पुलिस आयुक्त ने BDDS यानी बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड की कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने संदिग्ध वस्तुओं की पहचान, सुरक्षित घेराबंदी और विस्फोटक खतरे की स्थिति में BDDS टीम की त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व को समझाया। इसके साथ ही PIDS यानी पेरिमीटर इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह प्रणाली प्रमुख प्रतिष्ठानों की बाहरी सीमा पर घुसपैठ की पहचान कर सुरक्षा घेरा मजबूत करने में अत्यंत प्रभावी है।
प्रशिक्षु महिलाओं को टायर किलर प्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि किसी भी संदिग्ध वाहन को आवश्यकता पड़ने पर टायर किलर सिस्टम सक्रिय कर तुरंत रोका जा सकता है, जिससे बड़े खतरे को टाला जा सकता है। इसके अलावा एंटी ड्रोन सुरक्षा प्रणाली की उपयोगिता समझाते हुए ड्रोन गतिविधियों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण के माध्यम से संभावित खतरों की रोकथाम के तरीकों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
डॉग स्क्वाड की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पुलिस आयुक्त ने कहा कि विस्फोटक पदार्थों की खोज और संदिग्ध वस्तुओं की पहचान में डॉग स्क्वाड बेहद प्रभावी होता है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में डॉग स्क्वाड की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था अधिक भरोसेमंद बनती है। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की त्वरित उपलब्धता को सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि आपात सेवाओं का रिस्पांस समय न्यूनतम रखा जाए, ताकि किसी भी स्थिति में जनहानि को रोका जा सके।
सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था पर बोलते हुए पुलिस आयुक्त ने ड्रोन कैमरा, बुलेट कैमरा, नाइट विजन और थर्मल कैमरों की उपयोगिता को समझाया। उन्होंने बताया कि ड्रोन कैमरे भीड़भाड़ वाले इलाकों में व्यापक निगरानी में सहायक होते हैं, जबकि बुलेट कैमरे बाहरी परिधि और दूरस्थ क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। नाइट विजन और थर्मल कैमरे रात्रिकालीन सुरक्षा और अंधेरे क्षेत्रों की निगरानी में अत्यंत उपयोगी होते हैं।
अंत में पुलिस आयुक्त ने महिला प्रशिक्षुओं को ड्यूटी के दौरान अनुशासन, समयपालन और शालीन व्यवहार बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस बल का अनुशासन ही जनता का विश्वास मजबूत करता है। इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान सहायक पुलिस आयुक्त लाइन डॉ ईशान सोनी, प्रतिसार निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
