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Varanasi

वाराणसी: बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी केस में 14 पर कार्रवाई

Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
Last updated: 30/04/2026 10:52
By
Sandeep Srivastava
Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
BySandeep Srivastava
Sandeep Srivastava serves as a Sub Editor at News Report, a registered Hindi newspaper dedicated to ethical, accurate, and reader-focused journalism. He is responsible for copy...
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7 Min Read
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर का बाहरी दृश्य
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी का मामला सामने आया।
Contents
  • बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी प्रकरण जांच रिपोर्ट के बाद 14 पर कार्रवाई परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
  • जांच में सामने आई पहचान प्रक्रिया में बड़ी चूक
  • गलत विभाग में ले जाकर लगा दिया गया चीरा
  • बाद में हुआ जटिल ऑपरेशन और इलाज
  • उपचार के दौरान हुई मौत पर उठे सवाल
  • दूसरी मरीज की सर्जरी रही सफल
  • प्रशासन ने लागू किए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल
  • परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
  • जांच की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल
  • पुलिस ने मेडिकल बोर्ड को भेजा मामला
  • स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे व्यापक सवाल

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी प्रकरण जांच रिपोर्ट के बाद 14 पर कार्रवाई परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के ट्रॉमा सेंटर में सामने आए गलत सर्जरी के प्रकरण ने एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था की कार्यप्रणाली और मरीज सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सात मार्च को हुई इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया बल्कि मरीजों के परिजनों के बीच भी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित फैक्ट फाइंडिंग समिति ने अपनी विस्तृत जांच पूरी कर रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है जिसके आधार पर संस्थान प्रशासन ने 14 चिकित्सकों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

जांच में सामने आई पहचान प्रक्रिया में बड़ी चूक

समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह पूरा मामला तकनीकी विफलता नहीं बल्कि मरीज की पहचान सुनिश्चित करने में हुई गंभीर लापरवाही का परिणाम है। घटना के दिन दो अलग अलग मरीजों का नाम राधिका देवी होने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। दोनों को एक ही प्री ऑपरेटिव कक्ष में रखा गया था जबकि निर्धारित मानकों के अनुसार मरीजों की पहचान का बहु स्तरीय सत्यापन अनिवार्य होता है। समिति ने माना कि ऑपरेशन से पहले फाइल टैग और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पुनः पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए थी लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में चूक हुई।

गलत विभाग में ले जाकर लगा दिया गया चीरा

रिपोर्ट के अनुसार बलिया जिले की निवासी 71 वर्षीय राधिका देवी को न्यूरोसर्जरी विभाग में स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया था। लेकिन उन्हें गलती से अस्थि रोग विभाग के ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया जहां कूल्हे के ऑपरेशन की तैयारी कर ली गई और प्रारंभिक चीरा भी लगा दिया गया। हालांकि कुछ ही देर में सर्जिकल टीम को अपनी गलती का एहसास हो गया और बिना किसी आगे की प्रक्रिया के चीरे को बंद कर दिया गया। इसके बाद मरीज को तत्काल सही विभाग में स्थानांतरित किया गया और परिजनों को घटना की जानकारी दी गई।

बाद में हुआ जटिल ऑपरेशन और इलाज

चिकित्सकों के अनुसार एक्स रे और अन्य जांचों में यह स्पष्ट हुआ कि हड्डी से संबंधित कोई सर्जिकल हस्तक्षेप नहीं किया गया था। निर्धारित प्रक्रिया के तहत बाद में टांके हटाए गए और मरीज की स्थिति सामान्य पाई गई। इसके बाद 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी विभाग में उसी मरीज का स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। यह ऑपरेशन जोखिमपूर्ण माना जाता है जिसके लिए परिजनों से पूर्व सहमति ली गई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज को दस दिनों तक पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रखा गया जहां उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार दर्ज किया गया।

उपचार के दौरान हुई मौत पर उठे सवाल

इलाज के दौरान 27 मार्च की सुबह अचानक हृदयाघात होने से मरीज की स्थिति गंभीर हो गई। उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया गया लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कूल्हे पर लगाए गए प्रारंभिक चीरे को मृत्यु का कारण मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है जैसा कि कुछ जगहों पर बताया गया।

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दूसरी मरीज की सर्जरी रही सफल

इसी दौरान दूसरी मरीज जो वाराणसी की 82 वर्षीय राधिका देवी थीं और जिनका कूल्हे का ऑपरेशन निर्धारित था उनकी सर्जरी 9 मार्च को सफलतापूर्वक की गई। इस तथ्य से यह स्पष्ट होता है कि पूरी घटना तकनीकी असफलता नहीं बल्कि पहचान प्रक्रिया में हुई चूक का परिणाम थी।

प्रशासन ने लागू किए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। अब सभी मरीजों के लिए कलाई पर पहचान टैग पहनना अनिवार्य कर दिया गया है जिसमें नाम आयु विभाग और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज होगी। इसके साथ ही सर्जरी से पहले बहु स्तरीय पहचान सत्यापन प्रणाली को सख्ती से लागू किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतका के परिजनों ने पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतका के पोते मृत्युंजय पाल ने लंका थाने में लिखित शिकायत देकर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सात मार्च को ऑपरेशन थियेटर में ले जाने से पहले परिवार से कोई सहमति नहीं ली गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने गलत सर्जरी को लेकर सवाल उठाए तो कुछ जूनियर डॉक्टरों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

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जांच की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल

परिजनों ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में यह उल्लेख किया गया है कि एक अप्रैल को संस्थान के निदेशक से शिकायत करने के बाद संबंधित चिकित्सकों की टीम ने मामले को दबाने और समझौते का दबाव बनाया। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच समिति के अध्यक्ष स्वयं उसी टीम का हिस्सा थे जिस पर लापरवाही के आरोप लगे हैं।

पुलिस ने मेडिकल बोर्ड को भेजा मामला

इस मामले में लंका थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और नियमानुसार इसे मेडिकल बोर्ड के समक्ष भेजा जाएगा। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे व्यापक सवाल

यह पूरा प्रकरण केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद उन खामियों को उजागर करता है जिनकी अनदेखी लंबे समय से होती रही है। एक छोटी सी प्रशासनिक चूक किस प्रकार गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है यह घटना उसका उदाहरण बन गई है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के साथ साथ भविष्य में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम कितने प्रभावी साबित होते हैं।

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