आंधी बारिश में ढही तीन मंजिला मकान की दीवार कारखाने पर गिरने से कई मजदूर दबे
वाराणसी: चौकाघाट हुकुलगंज मार्ग पर बुधवार को तेज आंधी और बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। अचानक मौसम के बदलते मिजाज और तेज हवाओं के दबाव में एक तीन मंजिला मकान की करीब पंद्रह फीट लंबी दीवार भरभराकर गिर पड़ी। यह दीवार बगल में स्थित एक सबमर्सिबल रिपेयरिंग कारखाने के टीनशेड को तोड़ते हुए सीधे अंदर काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरी। हादसे के समय कारखाने के भीतर पांच से छह मजदूर मौजूद थे, जो मलबे के नीचे दब गए। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर अफरा तफरी मच गई और आसपास के लोग भयभीत होकर बाहर निकल आए।
स्थानीय लोगों ने शुरू किया राहत कार्य
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने साहस और तत्परता का परिचय देते हुए बिना किसी देरी के राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। आसपास मौजूद लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाना शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद चार मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई। इस दौरान घटनास्थल पर चीख पुकार और अफरा तफरी का माहौल बना रहा, लेकिन लोगों ने धैर्य बनाए रखते हुए घायल मजदूरों की मदद की।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताई हादसे की भयावहता
मलबे से बाहर निकाले गए मजदूर पवन ने बताया कि सभी लोग सामान्य रूप से अपने काम में लगे हुए थे। उसी दौरान अचानक तेज बारिश और हवा के बीच जोरदार आवाज हुई और कुछ समझ पाते उससे पहले ही दीवार टीनशेड पर गिर पड़ी। उन्होंने बताया कि किसी को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और सभी मजदूर मलबे के नीचे दब गए।
पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एनडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। टीम ने सबसे पहले हालात को नियंत्रित करते हुए बचाव कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कारखाने की बिजली आपूर्ति बंद कराई गई, ताकि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त खतरा न हो। इसके बाद एनडीआरएफ के जवानों ने सर्च ऑपरेशन तेज किया और मलबे में फंसे दो अन्य मजदूरों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती
सभी घायलों को तत्काल जिला और मंडलीय अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। हादसे के बाद अस्पतालों में भी अफरा तफरी का माहौल देखने को मिला, जहां परिजन और स्थानीय लोग घायलों का हाल जानने के लिए पहुंचे।
प्रारंभिक जांच में लापरवाही की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस कारखाने पर दीवार गिरी वह बबलू खान का बताया जा रहा है, जबकि मकान मुन्ना तिवारी का है। जानकारी के अनुसार मकान की तीसरी मंजिल के ऊपर बनी दीवार की जोड़ाई अधूरी थी और उसे अस्थायी रूप से छोड़ दिया गया था। तेज आंधी और बारिश के दबाव को यह कमजोर संरचना सहन नहीं कर सकी और अचानक गिर गई, जिससे यह बड़ा हादसा हो गया।
मौके पर जुटी भीड़ और जारी है राहत कार्य
फिलहाल मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है। एनडीआरएफ और पुलिस की टीम मलबे में दबे अन्य संभावित लोगों की तलाश में लगातार जुटी हुई है। घटनास्थल पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई है, जबकि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी सावधानी और मानकों के अनुसार किया गया होता, तो शायद इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। प्रशासन से मांग की जा रही है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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