वाराणसी में गंगा नौका संचालन पर सख्ती, अब पंजीकृत और आरटीएम प्रमाणित नावों को ही मिलेगी अनुमति
वाराणसी: काशी के विश्व प्रसिद्ध गंगा घाटों पर नौका संचालन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत आगामी दिनों में गंगा नदी में केवल उन्हीं नावों को संचालन की अनुमति दी जाएगी जिनका विधिवत पंजीकरण होगा और जिन्हें रेडी टू मूव यानी आरटीएम प्रमाणपत्र जारी किया गया होगा। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से गंगा घाटों पर नावों की बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न होने वाली अव्यवस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा और यात्रियों की सुरक्षा भी बेहतर होगी।
वाराणसी देश और दुनिया के प्रमुख धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग गंगा में नौका विहार के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, धार्मिक आयोजनों और पर्व त्योहारों के दौरान घाटों पर नावों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में कई बार घाटों के आसपास नावों की भीड़ इतनी अधिक हो जाती है कि आवाजाही प्रभावित होने लगती है। प्रशासन के अनुसार बिना उचित सत्यापन और निर्धारित मानकों के संचालन करने वाली नावें व्यवस्था के साथ साथ सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती हैं।
सभी नावों का होगा सत्यापन और तकनीकी निरीक्षण
नई व्यवस्था के अंतर्गत गंगा में संचालित प्रत्येक नाव का सत्यापन, तकनीकी निरीक्षण और पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि केवल उन्हीं नावों को संचालन की अनुमति दी जाएगी जो निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करेंगी। इसके लिए नावों की तकनीकी स्थिति, उनकी क्षमता तथा संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंगा में चलने वाली प्रत्येक नाव यात्रियों की सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरती हो।
अधिकारियों का मानना है कि इससे नौका संचालन व्यवस्था अधिक संगठित होगी और घाटों पर निगरानी व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही किसी भी नाव की पहचान और उसके संचालन संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण बेहतर होगा।
आईडब्ल्यूएआई और घाट संचालकों को सौंपी गई जिम्मेदारी
नावों को पंजीकरण संख्या प्रदान करने की जिम्मेदारी भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और संबंधित घाट संचालकों को सौंपी गई है। नाविकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी नावों का पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद संबंधित नावों का निरीक्षण किया जाएगा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाए जाने पर उन्हें रेडी टू मूव प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना आरटीएम प्रमाणपत्र वाली किसी भी नाव को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही नहीं बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षित जल परिवहन वातावरण तैयार करना भी है।
आरटीओ की अनुमति के बाद ही हो सकेगा संचालन
परिवहन विभाग और आरटीओ की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उन्हीं नावों को संचालन की स्वीकृति दी जाएगी जिनके दस्तावेज पूर्ण होंगे और जिन्हें सर्वेयर द्वारा उपयुक्त घोषित किया जाएगा। सर्वेयर की जांच के बाद ही नाव को आरटीएम प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसके बिना किसी भी नाव को गंगा में व्यावसायिक संचालन की अनुमति नहीं होगी।
इस प्रक्रिया से प्रशासन को नावों का अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और किसी दुर्घटना या आपात स्थिति में संबंधित नाव तथा उसके संचालक की पहचान तुरंत की जा सकेगी। इससे जवाबदेही तय करने और आवश्यक कार्रवाई करने में भी सुविधा होगी।
सुरक्षा और व्यवस्था दोनों को मिलेगा लाभ
गंगा घाटों पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुरक्षित नौका संचालन प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजीकरण और आरटीएम प्रमाणन व्यवस्था लागू होने के बाद गंगा में संचालित नावों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में सुधार आएगा। साथ ही अवैध और अनियमित संचालन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
इस नई व्यवस्था से नाविकों को भी एक स्पष्ट और नियमित प्रणाली के अंतर्गत कार्य करने का अवसर मिलेगा। वहीं यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा और उन्हें अधिक सुरक्षित नौका यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस कदम से घाटों पर भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और नौका संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आएगी।
वाराणसी की पहचान से जुड़ा है गंगा नौका संचालन
वाराणसी की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन पहचान गंगा और उसके घाटों से गहराई से जुड़ी हुई है। यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक गंगा में नौका विहार को अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। ऐसे में नौका संचालन व्यवस्था को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाए रखना प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई पंजीकरण और आरटीएम प्रणाली लागू होने के बाद गंगा में संचालित प्रत्येक नाव की स्पष्ट पहचान होगी, जिससे घाटों पर अनुशासन, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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