ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की ऐतिहासिक बैठक का साक्षी बनेगी काशी, दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि पहुंचे वाराणसी, सांस्कृतिक कूटनीति के वैश्विक मंच पर चमकेगा बनारस
वाराणसी: दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी काशी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनने जा रही है। ब्रिक्स देशों के संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का वाराणसी आगमन शुरू हो चुका है। गुरुवार से शुरू हो रही दो दिवसीय बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण और वैश्विक सांस्कृतिक साझेदारी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर पर विदेशी प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता के नेतृत्व में अधिकारियों और प्रशासनिक टीम ने अतिथियों का पारंपरिक भारतीय शैली में स्वागत किया। विदेशी मेहमानों के स्वागत में बनारस की लोक संस्कृति, शहनाई वादन, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। काशी की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखकर विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि प्रभावित नजर आए और उन्होंने स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
विश्व मंच पर सांस्कृतिक राजधानी की भूमिका निभाएगी काशी
जी 20 की सफल मेजबानी के बाद अब काशी एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनी है। ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की यह बैठक न केवल भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई मजबूती देगी बल्कि वैश्विक स्तर पर काशी की पहचान को भी और व्यापक बनाएगी। विश्व के सबसे प्राचीन शहरों में शामिल वाराणसी में आयोजित यह सम्मेलन विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक उद्योगों, अभिलेखागार, साहित्य, कला, सांस्कृतिक पर्यटन और सांस्कृतिक आदान प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच साझा सांस्कृतिक परियोजनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी।
तनावपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच बढ़ा सम्मेलन का महत्व
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई क्षेत्रों में जारी तनाव और संघर्षों के बीच वाराणसी में होने वाली यह बैठक विशेष महत्व रखती है। ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि एक मंच पर मौजूद रहेंगे। सांस्कृतिक विरासतों को युद्ध और आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने तथा प्रभावित धरोहरों के संरक्षण और पुनर्स्थापन जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृति संवाद का ऐसा माध्यम है जो राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देशों को एकजुट करने की क्षमता रखता है।
एयरपोर्ट से होटल तक चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
ब्रिक्स प्रतिनिधियों के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थागत तैयारियां की हैं। एयरपोर्ट से लेकर होटल ताज और सम्मेलन स्थल तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रतिनिधियों के आवागमन, भ्रमण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विस्तृत रूट मैप तैयार किया गया है। इसके अलावा गंगा आरती, काशी विश्वनाथ धाम दर्शन और अन्य सांस्कृतिक स्थलों के भ्रमण की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने स्वयं विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को सभी तैयारियां समयबद्ध और व्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा, वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।
काशी की कला, शिल्प और परंपरा से रूबरू होंगे विदेशी मेहमान
सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों को काशी की समृद्ध शिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें बनारस गुलाबी मीनाकारी, बनारसी ब्रोकेड साड़ी, सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क, लकड़ी के खिलौने, मेटल रिपोजी क्राफ्ट, ग्लास बीड्स और अन्य जीआई टैग प्राप्त उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही हस्तशिल्प, कालीन, रेशमी वस्त्र और पारंपरिक कलाकृतियों को भी प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया गया है।
स्थानीय शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए यह आयोजन एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विदेशी प्रतिनिधि न केवल इन उत्पादों को करीब से देखेंगे बल्कि उनके निर्माण की प्रक्रिया और सांस्कृतिक महत्व को भी समझेंगे। इससे काशी के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का नया अवसर मिल सकता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
पद्मश्री और जीआई विशेषज्ञ डॉ रजनीकांत के अनुसार ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी काशी के शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। उन्होंने कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों के सामने सीधे उत्पादों का प्रदर्शन होने से निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी और स्थानीय कलाकारों को वैश्विक पहचान प्राप्त हो सकेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मंच के माध्यम से काशी के उत्पादों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलते हैं तो इससे हजारों कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े परिवारों को सीधा लाभ पहुंचेगा। साथ ही काशी की पारंपरिक कला और शिल्प को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।
सांस्कृतिक कूटनीति का वैश्विक केंद्र बनी काशी
ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की यह बैठक केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और काशी की वैश्विक पहचान का प्रतीक बनकर उभर रही है। दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी, सांस्कृतिक विरासत पर मंथन, शिल्प और कला का प्रदर्शन तथा वैश्विक सहयोग की नई संभावनाएं इस आयोजन को ऐतिहासिक महत्व प्रदान कर रही हैं। आने वाले दो दिनों तक काशी विश्व संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनी रहेगी और यहां से निकले निष्कर्ष भविष्य में वैश्विक सांस्कृतिक साझेदारी को नई दिशा देने का कार्य करेंगे।
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