वाराणसी में अवैध गेस्ट हाउस, होटल और रेस्टोरेंट का बढ़ता साम्राज्य, क्या किसी बड़े हादसे का प्रशासन कर रहा इंतजार
वाराणसी: विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरी, आध्यात्मिक राजधानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पर्यटन का विस्तार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। काशी विश्वनाथ धाम के भव्य पुनर्विकास, गंगा घाटों की बढ़ती लोकप्रियता, सारनाथ के अंतरराष्ट्रीय आकर्षण और धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु, पर्यटक और विदेशी नागरिक वाराणसी पहुंच रहे हैं। पर्यटन के इस बढ़ते दबाव के साथ शहर में होटल, गेस्ट हाउस, लॉज, होम स्टे, धर्मशालाओं और रेस्टोरेंटों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। लेकिन इस विकास के पीछे एक ऐसा सच भी छिपा हुआ दिखाई दे रहा है, जो भविष्य में किसी बड़े संकट का कारण बन सकता है। सवाल यह है कि क्या शहर में संचालित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान निर्धारित सुरक्षा मानकों, फायर नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं या फिर यह पूरा तंत्र किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। आग की भयावह घटना में कई लोगों की जान चली गई और जांच में सामने आया कि संबंधित प्रतिष्ठान में सुरक्षा संबंधी कई गंभीर खामियां थीं। फायर एनओसी का अभाव, आपातकालीन निकास मार्गों की कमी और निर्धारित क्षमता से अधिक संचालन जैसी लापरवाहियां इस त्रासदी की बड़ी वजह बनीं। यह घटना केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है बल्कि देश के उन सभी शहरों के लिए चेतावनी है जहां पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हो रहा है लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और नियामक निगरानी अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती।
पर्यटन नगरी में तेजी से फैल रहा व्यावसायिक विस्तार
वाराणसी के कैंट, लंका, अस्सी, भेलूपुर, दशाश्वमेध, गोदौलिया, सारनाथ, रामनगर, शिवपुर, राजातालाब और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट खुले हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इनमें से कई प्रतिष्ठान ऐसे स्थानों पर संचालित हो रहे हैं जहां पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई भवन मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बनाए गए थे लेकिन बाद में उनका व्यावसायिक उपयोग शुरू हो गया। कई जगहों पर संकरी गलियों और घनी आबादी के बीच बहुमंजिला गेस्ट हाउस और होटल संचालित किए जा रहे हैं, जहां किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य बेहद कठिन हो सकता है।
शहर के अनेक इलाकों में यह भी देखने को मिलता है कि अग्निशमन यंत्र केवल दिखावे के लिए लगाए गए हैं। कई प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया है। कई भवनों में आपातकालीन निकास मार्ग या तो नहीं हैं या फिर उनका उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। यदि किसी भी कारण से आग लग जाए या अन्य आपदा उत्पन्न हो जाए तो वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा गंभीर चुनौती बन सकती है।
कागजों में नियम, जमीन पर कितनी हकीकत
नियमों के अनुसार किसी भी होटल, गेस्ट हाउस, लॉज या बड़े रेस्टोरेंट के संचालन के लिए नगर निगम, विकास प्राधिकरण, पर्यटन विभाग, अग्निशमन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां लेना अनिवार्य होता है। फायर एनओसी, भवन सुरक्षा प्रमाणन, पार्किंग व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाएं किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के लिए बुनियादी आवश्यकता मानी जाती हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सभी मानकों की नियमित समीक्षा की जा रही है। क्या जिन प्रतिष्ठानों को वर्षों पहले अनुमति दी गई थी, उनकी वर्तमान स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। क्या फायर विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा है। क्या नगर निगम और विकास प्राधिकरण यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भवनों का उपयोग स्वीकृत मानकों के अनुरूप ही हो रहा है। यदि इन सवालों का जवाब संतोषजनक नहीं है तो यह स्थिति चिंता का विषय है।
घाटों और धार्मिक क्षेत्रों में बढ़ रहा जोखिम
काशी विश्वनाथ धाम, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट, अस्सी घाट और सारनाथ जैसे क्षेत्रों में प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं। पर्यटन सीजन और विशेष पर्वों के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे क्षेत्रों के आसपास संचालित होटल और गेस्ट हाउस यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते तो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। संकरी गलियां, सीमित पहुंच मार्ग और भीड़भाड़ बचाव कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहरों में सुरक्षा मानकों को लेकर सामान्य शहरों की तुलना में अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है क्योंकि यहां आने वाले लोगों की संख्या लगातार बदलती रहती है और बड़ी संख्या में बाहरी नागरिक भी मौजूद रहते हैं।
जवाबदेही किसकी और कार्रवाई कब
पर्यटन विभाग का दायित्व पर्यटकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी आग से सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। नगर निगम और विकास प्राधिकरण भवन निर्माण तथा उपयोग संबंधी नियमों की निगरानी करते हैं। वहीं कमिश्नरेट पुलिस सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मानकविहीन प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं तो यह केवल एक विभाग की नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी का विषय बन जाता है।
शहर के नागरिकों का कहना है कि समय समय पर जांच अभियान चलाए जाते हैं लेकिन उनके परिणाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते। लोगों का मानना है कि यदि व्यापक और पारदर्शी सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है और संभावित खतरों की पहचान समय रहते की जा सकती है।
काशी की वैश्विक छवि से भी जुड़ा है मुद्दा
वाराणसी केवल उत्तर प्रदेश का एक शहर नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं। यदि किसी होटल, गेस्ट हाउस या रेस्टोरेंट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो उसका प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश और शहर की छवि प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन की वास्तविक सफलता दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने में नहीं बल्कि दुर्घटना होने से पहले उसे रोकने में होती है। दिल्ली की त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी और निगरानी में ढिलाई कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
समय रहते जरूरी है व्यापक सुरक्षा अभियान
शहर के जानकारों और नागरिकों का मानना है कि वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में संचालित सभी होटल, गेस्ट हाउस, लॉज, होम स्टे और रेस्टोरेंटों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। जिन प्रतिष्ठानों के पास फायर एनओसी, वैध लाइसेंस या अन्य आवश्यक अनुमतियां नहीं हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित किया जाना चाहिए ताकि पर्यटक और नागरिक सुरक्षित स्थानों का चयन कर सकें।
दिल्ली में हुई दर्दनाक घटना ने पूरे देश को एक गंभीर संदेश दिया है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या वाराणसी में जिम्मेदार विभाग इस चेतावनी को समय रहते गंभीरता से लेंगे और व्यापक सुरक्षा जांच अभियान चलाएंगे या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था सक्रिय होती दिखाई देगी। देश की सांस्कृतिक राजधानी होने के नाते काशी को केवल पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की ही नहीं बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही के सर्वोच्च मानकों की भी आवश्यकता है।
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