वाराणसी में दरोगा को गोली मारकर पिस्टल लूटने वाला एक लाख का इनामी लल्लन सिंह सहारनपुर मुठभेड़ में ढेर
वाराणसी/सहारनपुर: वर्ष 2022 में वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में सब इंस्पेक्टर को गोली मारकर उनकी सर्विस पिस्टल लूटने की सनसनीखेज घटना के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश लल्लन सिंह को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने सहारनपुर में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। लल्लन सिंह बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र के आनंदगोलवा गांव का निवासी था और लंबे समय से उत्तर प्रदेश तथा बिहार पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। उस पर वाराणसी पुलिस आयुक्त की ओर से एक लाख रुपये तथा चंदौली पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात सहारनपुर के सरसावा नकुड़ मार्ग पर हुई मुठभेड़ में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गई जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रोहनिया में दरोगा को गोली मारकर लूटी थी सर्विस पिस्टल
पुलिस अभिलेखों के अनुसार लल्लन सिंह आठ नवंबर 2022 को वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में सब इंस्पेक्टर अजय यादव को गोली मारकर उनकी सर्विस पिस्टल लूटने की घटना में वांछित था। इस घटना के बाद वाराणसी पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। इसके अतिरिक्त एक नवंबर 2022 को चंदौली जिले में हुई गोलीबारी और लूट की घटना में भी उसका नाम सामने आया था। दोनों मामलों में वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश के लिए कई एजेंसियां सक्रिय थीं।
सात हत्याओं समेत कई संगीन मामलों में दर्ज थे मुकदमे
पुलिस के अनुसार लल्लन सिंह अपने भाइयों और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर कई जघन्य अपराधों में शामिल रहा था। उसके खिलाफ सात लोगों की हत्या के आरोप दर्ज थे जिनमें दो सब इंस्पेक्टर एक बैंक कैशियर और एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे। इसके अलावा बैंक डकैती कैश वैन लूट और सरकारी हथियार लूटने जैसी गंभीर वारदातों में भी उसका नाम सामने आया था। उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों में उसके खिलाफ अनेक आपराधिक मुकदमे दर्ज थे जिसके चलते वह पुलिस की सबसे वांछित सूची में शामिल था।
दोनों भाई पहले ही वाराणसी मुठभेड़ में मारे जा चुके थे
लल्लन सिंह के दोनों भाई मनीष सिंह और रजनीश सिंह उर्फ बउआ 21 नवंबर 2022 को वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए थे। रोहनिया में दरोगा को गोली मारने और सर्विस पिस्टल लूटने की घटना के बाद तत्कालीन पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के निर्देशन में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान दोनों भाइयों को पुलिस ने घेरकर मार गिराया था। उसी अभियान में लूटी गई 9 एमएम पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी। हालांकि उस समय लल्लन सिंह पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल रहा था।
एसटीएफ की निगरानी में था कुख्यात अपराधी
पुलिस सूत्रों के अनुसार लल्लन सिंह लगातार उत्तर प्रदेश एसटीएफ के रडार पर बना हुआ था। उसकी गतिविधियों पर खुफिया सूचनाओं और तकनीकी निगरानी के माध्यम से नजर रखी जा रही थी। विभिन्न राज्यों में उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही थी। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई लंबे समय से जारी थी और उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे थे।
सहारनपुर में हुई अंतिम मुठभेड़
रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात एएसपी लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस टीम को सूचना मिली कि लल्लन सिंह अपने एक साथी के साथ सहारनपुर क्षेत्र में मौजूद है। सूचना के आधार पर सरसावा नकुड़ मार्ग पर घेराबंदी की गई। पुलिस के अनुसार घिरने पर बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी जिसके जवाब में पुलिस ने भी कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान लल्लन सिंह गोली लगने से घायल हो गया। उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसावा ले जाया गया और बाद में जिला अस्पताल सहारनपुर रेफर किया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसका एक साथी मौके से भागने में सफल रहा जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं।
पुलिस के लिए बड़ी सफलता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार लल्लन सिंह लंबे समय से कई गंभीर मामलों में वांछित था और उसकी गिरफ्तारी अथवा निष्प्रभावी किए जाने को कानून व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। वाराणसी में सब इंस्पेक्टर पर हमले और सरकारी हथियार लूटने की घटना के बाद से वह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। सहारनपुर में हुई इस कार्रवाई को एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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