चंदौली के बेलवानी गांव में मासूम भाई बहन की मौत के बाद दूसरे दिन भी पसरा रहा मातम
चंदौली: बलुआ थाना क्षेत्र स्थित बेलवानी गांव में नहर में डूबकर जान गंवाने वाले मासूम भाई बहन आर्यन और अनुप्रिया की मौत के दूसरे दिन भी पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसरा रहा। सोमवार को हुए इस दर्दनाक हादसे ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। मंगलवार को भी गांव की पाल बस्ती में सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित दिखाई दिया। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले और ग्रामीणों के बीच दिनभर इसी घटना की चर्चा होती रही।
दुकान से लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार बलुआ थाना क्षेत्र के बेलवानी गांव निवासी पांच वर्षीय आर्यन और तीन वर्षीय अनुप्रिया दुकान से सामान लेकर वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान नहर पार करते समय दोनों बच्चे पानी में गिर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और गांव में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों ने बच्चों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
हादसे के दूसरे दिन भी बच्चों के घर पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। सुबह से ही रिश्तेदार, परिचित और ग्रामीण परिवार को सांत्वना देने पहुंचते रहे। घर के बाहर और आंगन में बैठे लोगों की आंखें नम दिखाई दीं। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश करता रहा, लेकिन दो मासूम बच्चों को खोने का दर्द किसी के लिए भी शब्दों में बयां करना आसान नहीं था।
सबसे अधिक खराब स्थिति मां राजकुमारी की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार वह अपने दोनों बच्चों की याद में बार बार बिलख पड़ती हैं। बच्चों की तस्वीरें और उनके कपड़े देखकर कई बार बेसुध हो जाती हैं। घर की महिलाएं और रिश्तेदार लगातार उनके साथ मौजूद रहकर उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे हैं। मां की करुण पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आ रही हैं।
पूरे मोहल्ले के चहेते थे दोनों बच्चे
ग्रामीणों के अनुसार आर्यन और अनुप्रिया पूरे मोहल्ले के चहेते थे। दोनों की मासूम मुस्कान और किलकारियों से बस्ती हमेशा गुलजार रहती थी। पड़ोसियों का कहना है कि सोमवार तक जिन बच्चों को खेलते कूदते देखा था उनके अचानक इस दुनिया से चले जाने पर अब भी विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। बच्चों की कमी पूरे मोहल्ले को लगातार महसूस हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाई बहन अक्सर साथ साथ खेलते और गांव की गलियों में घूमते दिखाई देते थे। उनकी मौजूदगी से पूरे इलाके में रौनक रहती थी। हादसे के बाद बच्चों को जानने वाला हर व्यक्ति गहरे दुख में है और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहा है।
पिता भी सदमे में, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बच्चों के पिता हीरालाल पाल निजी कंपनी में कार्यरत हैं। हादसे के समय वह घर से बाहर थे। घटना की सूचना मिलते ही वह तत्काल गांव पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों बच्चों की जान जा चुकी थी। परिजनों के अनुसार वह भी गहरे सदमे में हैं और बच्चों की याद में बार बार भावुक हो जा रहे हैं। परिवार में छह माह का एक और बेटा है, जिसे देखकर परिजन खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरे दिन भी नहीं लौटी सामान्य स्थिति
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय बाद इतना दुखद हादसा देखा है। घटना के दूसरे दिन भी गांव में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकी। कई परिवारों ने शोक स्वरूप भोजन तक नहीं बनाया। गांव की गलियों में असामान्य सन्नाटा दिखाई दिया और लोगों के चेहरों पर गहरा दुख साफ झलक रहा था।
गांव में छोड़ गया गहरा खालीपन
बेलवानी गांव में हर कोई यही कह रहा है कि दो मासूम जिंदगियों के असमय चले जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है उसे भर पाना आसान नहीं होगा। इस हादसे ने पूरे गांव को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है। परिवार के साथ साथ ग्रामीण भी इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बच्चों की यादें हर किसी की आंखें नम कर रही हैं। गांव में दूसरे दिन भी मातम का माहौल बना रहा और लोगों ने दिवंगत मासूमों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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