चंदौली के भरदुआ गांव में वन भूमि पर कार्रवाई का ग्रामीणों ने किया विरोध महिलाओं ने जेसीबी और ट्रैक्टर रोककर प्रशासन को लौटने पर किया मजबूर
चंदौली: नौगढ़ तहसील क्षेत्र स्थित जयमोहनी रेंज के भरदुआ गांव में सोमवार को वन विभाग की लगभग 30 बीघा भूमि को कब्जामुक्त कराने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम भूमि पर खेती रोकने तथा सुरक्षा के लिए खाई खुदवाने पहुंची थी, लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों के विरोध के चलते कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। कई घंटे तक चले गतिरोध के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को मौके से वापस लौटना पड़ा। पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसे देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही खेतों की ओर पहुंचे ग्रामीण
प्रशासन की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही भरदुआ गांव के सैकड़ों ग्रामीण खेतों की ओर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना था कि जिस भूमि पर उनके परिवार कई दशकों से खेती करते आ रहे हैं, उसी भूमि को अचानक वन विभाग की जमीन बताते हुए खाली कराने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप था कि उन्हें किसी प्रकार का पूर्व नोटिस या पर्याप्त सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि यह जमीन उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है और बिना उनकी बात सुने कार्रवाई करना उचित नहीं है।
ट्रैक्टर की जुताई शुरू होते ही महिलाओं ने संभाला मोर्चा
मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी विनय मिश्रा की मौजूदगी में खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर लगाया गया। जैसे ही ट्रैक्टर ने खेत में प्रवेश किया, गांव की महिलाएं सबसे आगे आ गईं। महिलाओं ने ट्रैक्टर के सामने खड़े होकर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। कुछ महिलाएं ट्रैक्टर पर चढ़ गईं जबकि अन्य महिलाओं ने अधिकारियों के वाहनों का घेराव कर विरोध दर्ज कराया। विरोध धीरे धीरे तेज होता गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर एकत्र हो गए।
जेसीबी के आगे लेट गईं महिलाएं
वन विभाग की टीम ने भूमि की सुरक्षा के लिए जेसीबी मशीन बुलाकर खाई खुदवाने की तैयारी शुरू की। इसी दौरान लगभग पचास से अधिक महिलाएं जेसीबी के सामने लेट गईं और मशीन को आगे बढ़ने नहीं दिया। महिलाओं का कहना था कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी तब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच लंबे समय तक बातचीत और बहस का दौर चलता रहा लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
भारी पुलिस बल की रही तैनाती
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया। चकिया क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में नौगढ़ चकरघट्टा चकिया और साहबगंज थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। लगभग अस्सी पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। वन विभाग की ओर से एसडीओ वरुण सिंह सहित विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बनाए रखी और दोनों पक्षों को शांत रखने का प्रयास किया।
ग्रामीणों ने आजीविका का मुद्दा उठाया
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि संबंधित भूमि उनके परिवारों की रोजी रोटी का एकमात्र सहारा है। उनका कहना था कि यदि खेती की जमीन उनसे छीन ली गई तो परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे अपने पक्ष की विधिक सुनवाई और समाधान के बिना भूमि खाली नहीं करेंगे। महिलाओं ने भी अधिकारियों से आग्रह किया कि पहले ग्रामीणों की बात सुनी जाए और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन और वन विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि वन विभाग की सरकारी भूमि है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान शासन के निर्देशों के अनुसार चलाया जा रहा है। विरोध के कारण सोमवार को कार्रवाई स्थगित कर दी गई और जेसीबी मशीन को वापस भेज दिया गया। प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता देते हुए मौके पर तत्काल किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की।
वन भूमि को लेकर पहले भी उठते रहे हैं विवाद
जयमोहनी रेंज में वन भूमि पर अतिक्रमण और उसे हटाने को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। विभिन्न अवसरों पर वन विभाग ने अभियान चलाकर वन भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की है जबकि दूसरी ओर कई ग्रामीण लंबे समय से खेती और आजीविका का अधिकार होने का दावा करते रहे हैं। इसी कारण क्षेत्र में वन भूमि और पारंपरिक खेती को लेकर समय समय पर विवाद की स्थिति बनती रही है। सोमवार की घटना ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच आगे होने वाली बातचीत तथा कानूनी प्रक्रिया पर अब सभी की नजर बनी हुई है।
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