वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस की बड़ी कार्रवाई में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़
वाराणसी: कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस टीम ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना सहित कुल उन्नीस आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई डीसीपी क्राइम नीतू कादयान के निर्देशन तथा एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना के नेतृत्व में की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य साक्ष्य भी बरामद किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस गिरोह का नेटवर्क कई लोगों को अपनी गिरफ्त में लेकर आर्थिक ठगी करने में सक्रिय था। प्राप्त तथ्यों के अनुसार यह कार्रवाई प्रदेश स्तर पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई है। 0
नौकरी का लालच देकर युवाओं को बनाया जाता था शिकार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी बेरोजगार युवाओं को आकर्षक नौकरी और बेहतर आय का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उनसे विभिन्न मदों के नाम पर धनराशि जमा कराई जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की साइबर ठगी में युवाओं की आर्थिक स्थिति और रोजगार की आवश्यकता का फायदा उठाया जाता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने किन किन राज्यों और जिलों के लोगों को अपना शिकार बनाया तथा ठगी की कुल राशि कितनी है।
साइबर अपराध के खिलाफ लगातार चल रही है कार्रवाई
डीसीपी क्राइम नीतू कादयान के निर्देशन में वाराणसी कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। पुलिस के अनुसार प्रदेश में चल रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के अंतर्गत अब तक आठ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए अब तक कुल अट्ठाईस शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित अभियान का उद्देश्य साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करना और आम नागरिकों को आर्थिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना है। 1
बरामद हुए मोबाइल फोन लैपटॉप वाहन और नकदी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से विभिन्न कंपनियों के कुल बीस मोबाइल फोन एक लैपटॉप दो चार पहिया वाहन तथा चार हजार बीस रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कार्रवाई के दौरान लगभग एक लाख रुपये की धनराशि संबंधित बैंक खातों में होल्ड कराई गई है। पुलिस इन उपकरणों और बैंक खातों की डिजिटल जांच कर रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तथा संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा सके।
जांच का दायरा बढ़ाया गया
साइबर क्राइम पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है और बैंकिंग लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह के संपर्क अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से थे या नहीं। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पृष्ठभूमि
वाराणसी में पिछले कुछ समय से साइबर अपराध के मामलों में लगातार कार्रवाई देखने को मिली है। इससे पहले भी फर्जी कॉल सेंटर फर्जी ट्रेडिंग फर्जी फ्रेंचाइजी और नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले कई गिरोहों का भंडाफोड़ किया जा चुका है। पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी अनजान संस्था या व्यक्ति के कहने पर नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि जमा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर क्राइम पुलिस अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी उपाय है। किसी भी नौकरी के प्रस्ताव की सत्यता की जांच किए बिना पंजीकरण शुल्क या अन्य किसी मद में धनराशि जमा करने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन और संबंधित पुलिस इकाई को सूचना देकर समय रहते आवश्यक कार्रवाई कराई जा सकती है।
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