सावन के दूसरे सोमवार पर काशी विश्वनाथ धाम में बड़ा बदलाव गंगा द्वार बंद छह रास्तों से श्रद्धालुओं को प्रवेश
वाराणसी में सावन के दूसरे सोमवार यानी 10 अगस्त को श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच दर्शन पूजन की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण सुरक्षा को देखते हुए धाम का गंगा द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। अब गंगा की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा द्वार और मंदिर घाट की तरफ से धाम में प्रवेश की अनुमति नहीं है। श्रद्धालुओं को अन्य निर्धारित रास्तों से प्रवेश कराया जा रहा है। मंदिर प्रशासन की ओर से की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य बढ़ते जलस्तर के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।
गंगा द्वार से प्रवेश बंद होने के बाद छह रास्तों से दर्शन
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण के अनुसार गंगा द्वार से आने वाले दर्शनार्थियों को मुख्य तीन रास्तों की ओर डायवर्ट किया गया है। श्रद्धालुओं को वाईएसके 2 सहित सरस्वती द्वार की ओर भेजा जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में गेट नंबर 4, सिल्को गली द्वार, काशी द्वार 4 बी, नंदूफारिया द्वार, सरस्वती फाटक और ढुंढिराज प्रवेश द्वार से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है। इस तरह गंगा द्वार बंद होने के बाद कुल छह प्रवेश रास्तों से दर्शन पूजन की लाइनें संचालित हो रही हैं।
सावन शुरू होने से पहले मंदिर प्रशासन की तैयारियों में सात प्रवेश मार्ग प्रस्तावित किए गए थे। इनमें गेट नंबर 4, काशी द्वार मार्ग 4 बी, नंदू फारिया प्रवेश मार्ग, सिल्को प्रवेश मार्ग, ढुंढिराज प्रवेश मार्ग, सरस्वती फाटक प्रवेश मार्ग और भैरव द्वार प्रवेश मार्ग शामिल था। मंदिर प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यदि गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो घाट की तरफ से श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। मौजूदा स्थिति में इसी व्यवस्था को लागू किया गया है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से लिया गया सुरक्षा फैसला
रविवार को गंगा का जलस्तर 63 दशमलव 78 मीटर तक पहुंचने के बाद गंगा द्वार को एहतियातन बंद करने का फैसला लिया गया। गंगा का पानी बढ़ने से घाटों के निचले हिस्सों में भी आवाजाही प्रभावित हुई है। ऐसे में श्रद्धालुओं को नदी की तरफ से धाम तक पहुंचने देने के बजाय उन्हें सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों से मंदिर परिसर में प्रवेश कराया जा रहा है। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा बदलाव उन श्रद्धालुओं के लिए हुआ है जो दशाश्वमेध घाट और शीतला घाट पर स्नान करने के बाद सीधे गंगा द्वार से बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए कतार में लगते थे। गंगा द्वार बंद होने के कारण अब उन्हें निर्धारित छह प्रवेश मार्गों में से किसी एक का इस्तेमाल करना होगा। इससे अन्य प्रवेश मार्गों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना के मद्देनजर बैरिकेडिंग और कतार प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है।
ललिता घाट से भी प्रवेश बंद
गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण ललिता घाट की तरफ से श्रद्धालुओं के प्रवेश पर भी रोक है। इससे धाम में दर्शन पूजन के लिए संचालित होने वाली लाइनें अब छह प्रवेश मार्गों पर केंद्रित हैं। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि गंगा द्वार और ललिता घाट से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाए और साथ ही भीड़ को एक स्थान पर जमा होने से रोका जाए।
सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने को देखते हुए मंदिर और जिला प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारी की थी। 10 अगस्त को धाम और आसपास के क्षेत्र में 2500 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। करीब पांच हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 10 हाईटेक ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है। बढ़ते गंगा जलस्तर को देखते हुए जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें भी सुरक्षा और बचाव के लिए तैनात हैं।
गंगा आरती देखने की व्यवस्था में भी बदलाव
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर गंगा आरती देखने की व्यवस्था पर भी पड़ा है। गंगा आरती के सामने घाट के पत्थरों पर बैठकर आरती देखने की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि गंगा का पानी बढ़ने के साथ घाटों के निचले हिस्से जोखिम वाले क्षेत्र में आ जाते हैं। श्रद्धालुओं से प्रशासन की ओर से निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही रहने और बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में नहीं जाने की अपेक्षा की जा रही है।
सावन में क्यों खास है दूसरा सोमवार
श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व वाला महीना माना जाता है। सनातन परंपरा में सावन के दौरान शिवलिंग पर जल अर्पित करने, भगवान शिव का पूजन करने और सोमवार का व्रत रखने की परंपरा है। सावन के सोमवार को भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। यही वजह है कि देश के अलग अलग हिस्सों से शिव भक्त सावन में काशी पहुंचते हैं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन तथा जलाभिषेक की इच्छा रखते हैं।
वर्ष 2026 में सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को था और दूसरा सोमवार 10 अगस्त को है। इसके बाद 17 अगस्त को तीसरा और 24 अगस्त को चौथा सोमवार पड़ेगा। इस अवधि में काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है। मंदिर प्रशासन ने सावन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश मार्गों की अलग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी के इंतजाम किए हैं।
सावन और काशी विश्वनाथ का धार्मिक महत्व
काशी को भगवान शिव की नगरी के रूप में धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सावन के महीने में बाबा विश्वनाथ के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं और शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। काशी की धार्मिक परंपरा में गंगा और विश्वनाथ दोनों का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से सामान्य दिनों में भी गंगा घाट से मंदिर तक आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
सावन सोमवार की पूजा में श्रद्धालु भगवान शिव को जल और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में शिव आराधना करने से भक्त को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात सुरक्षित तरीके से दर्शन करना है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण इस बार गंगा स्नान और मंदिर तक आने जाने के बीच सामान्य दिनों जैसी सीधी आवाजाही संभव नहीं है।
प्रशासन की अपील सुरक्षित रास्तों से ही धाम पहुंचें
मौजूदा व्यवस्था में श्रद्धालुओं को गंगा द्वार की ओर जाने के बजाय मंदिर प्रशासन की ओर से निर्धारित छह प्रवेश मार्गों का इस्तेमाल करना होगा। गंगा की तरफ से धाम में आने की अनुमति नहीं है। श्रद्धालुओं को बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। बुजुर्गों, बच्चों और अन्य श्रद्धालुओं को विशेष रूप से बढ़ते जलस्तर वाले घाटों के निचले हिस्सों में जाने से बचना चाहिए।
श्री काशी विश्वनाथ धाम में सावन के दूसरे सोमवार को दर्शन व्यवस्था का यह बदलाव सीधे तौर पर गंगा के बढ़ते जलस्तर से जुड़ा है। प्रशासन ने गंगा द्वार और ललिता घाट की तरफ से प्रवेश रोककर श्रद्धालुओं को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों पर भेजने की व्यवस्था की है। दूसरी ओर धाम और आसपास सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है कि वे निर्धारित प्रवेश मार्गों से ही धाम में जाएं और गंगा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए घाटों के संवेदनशील हिस्सों में जाने से बचें।
आधिकारिक जानकारी
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की धार्मिक और प्रशासनिक जानकारी मंदिर के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है। वाराणसी के घाटों और शहर से संबंधित सरकारी जानकारी जिला वाराणसी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
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