श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर व्रजधाम सरीखी दिखेगी काशी
वाराणसी में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी इस अवसर पर व्रजधाम सरीखी नजर आएगी। घरों से लेकर मंदिरों तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देर रात तक नंद के आनंद भयो के जयघोष से काशी का वातावरण भक्तिमय रहने की उम्मीद है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, इस्कॉन मंदिर और गोपाल मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट और झांकियां तैयार की गई हैं। इसके अलावा माहेश्वरी भवन, बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रावासों, अन्य शिक्षण संस्थानों, प्रतिष्ठानों और पुलिस लाइन में भी कान्हा के जन्मोत्सव का उल्लास दिखाई देगा।
मंदिरों और घरों में पूरी हुई तैयारियां
बृहस्पतिवार को काशी के प्रमुख मंदिरों के साथ ही घरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां चलती रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा कृष्ण की प्रतिमाओं के साथ उनके वस्त्र, पालना, शृंगार और पूजन सामग्री की खरीदारी की। शहर के चौक, बांसफाटक, रथयात्रा, सिगरा, लहुराबीर, गोदौलिया, लंका, मैदागिन और मंडुवाडीह सहित कई इलाकों में अस्थायी दुकानें सजी रहीं। इन दुकानों पर कान्हा की प्रतिमाओं के अलावा राधा कृष्ण की प्रतिमाएं, आकर्षक वस्त्र, पालना, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने और विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्री उपलब्ध रही। श्रद्धालुओं ने अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी की और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी कीं।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और इस्कॉन मंदिर में विशेष आयोजन
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर विशेष झांकी सजाई गई है। वहीं इस्कॉन मंदिर में भी आकर्षक सजावट की गई है। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही जन्मोत्सव का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा। श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करेंगे और जन्म के समय आरती तथा भजन कीर्तन में शामिल होंगे। मंदिरों और घरों में बाल गोपाल को पालने में झुलाने की परंपरा भी निभाई जाएगी।
पांच साल बाद गृहस्थ और वैष्णव एक साथ मनाएंगे जन्माष्टमी
इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर विशेष संयोग बताया जा रहा है। पांच साल बाद गृहस्थ और वैष्णव दोनों एक साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बार उदया तिथि और रोहिणी नक्षत्र की अष्टमी एक ही दिन होने से विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस संयोग के कारण जयंती नामाष्टमी योग बन रहा है। इसी विशिष्ट योग में गृहस्थ और वैष्णव दोनों भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। मंदिरों, मठों, आश्रमों और घरों में मध्यरात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास दिखाई देगा।
रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का विशेष संयोग
ज्योतिषविदों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र बृहस्पतिवार की रात 12 बजकर 43 मिनट से अगले दिन उदया तिथि में शुक्रवार की रात 11 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। वहीं भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बृहस्पतिवार की रात 1 बजकर 33 मिनट से शुक्रवार की रात 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि और औदायिक रोहिणी के एक साथ मिलने से इस बार गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए एक ही दिन जन्माष्टमी मनाने का अवसर बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर व्रत रखकर विधि विधान से पूजा करने से पुण्य और सिद्धियों की प्राप्ति होती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है।
रामनगर में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह
रामनगर संवाददाता के अनुसार रामनगर में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। नगर में स्थित थाना परिसर को झालरों से सजाया गया है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं 36वीं वाहिनी पीएसी के प्रांगण को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया है। पीएसी परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। नगर के विभिन्न मंदिरों में भी भव्य सजावट की गई है और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
काशी में देर रात तक गूंजेंगे भजन और जयकारे
जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को काशी में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला देर रात तक चलेगा। मंदिरों में भजन कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण की झांकियों के माध्यम से जन्मोत्सव का उल्लास दिखाई देगा। घरों में भी श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करेंगे। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच आरती की जाएगी। काशी के विभिन्न क्षेत्रों में मंदिरों की सजावट और धार्मिक आयोजनों के कारण पर्व का वातावरण दिखाई देगा। रामनगर से लेकर शहर के प्रमुख मंदिरों तक श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होंगे और नंद के आनंद भयो के जयघोष से काशी भक्तिमय नजर आएगी।
न्यूज रिपोर्ट परिवार की ओर से आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
जय श्री कृष्ण
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