रामनगर दुर्ग में 25 अक्टूबर को होंगे दक्षिणामुखी काले हनुमानजी के दर्शन, सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक खुलेगा मंदिर
रामनगर (वाराणसी)। विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की परंपरा के साथ ही दुर्ग स्थित दक्षिणामुखी काले हनुमानजी के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। दुर्ग प्रशासन ने रविवार, 25 अक्टूबर को आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में दर्शन की व्यवस्था निर्धारित की है। इसके तहत भक्त पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न तीन बजे तक दक्षिणामुखी काले हनुमानजी के दर्शन कर सकेंगे। पिछली दो बार दर्शन के दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को पुलिस और दुर्ग प्रशासन के अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श कर दर्शन की व्यवस्था की रूपरेखा तैयार की गई, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रहे और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।
पुलिस और दुर्ग प्रशासन ने तैयार की दर्शन व्यवस्था
दुर्ग प्रशासन के कैप्टन राजेश शर्मा ने बताया कि प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद दक्षिणामुखी हनुमानजी का दर्शन आम श्रद्धालुओं को कराने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए इस बार भी दर्शन का समय निर्धारित किया गया है। रामनगर दुर्ग के दक्षिणी छोर पर स्थित दक्षिणामुखी श्यामवर्ण हनुमानजी का मंदिर वर्ष में विशेष अवसर पर ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसी वजह से मंदिर में दर्शन के लिए स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। यह धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यता है।
दर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्रा और दुर्ग प्रशासन के कैप्टन राजेश शर्मा के बीच हुई मंत्रणा के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने की योजना बनाई गई। पिछले आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ पहुंचने से उत्पन्न अव्यवस्था को देखते हुए इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु निर्धारित समय के भीतर कतारबद्ध और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर सकें। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों से भी अपेक्षा की गई है कि वे पुलिस और दुर्ग प्रशासन के निर्देशों का पालन करें तथा भीड़ के बीच धैर्य बनाए रखें।
राम राज्याभिषेक की भोर की आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में शनिवार शाम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की लीला का मंचन किया गया। इस पारंपरिक आयोजन के बाद पूरी रात प्रभु श्रीराम राजसिंहासन पर विराजमान रहे। उनके साथ माता जानकी और तीनों भाई भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न अपने-अपने आसनों पर सुशोभित रहे। रामलीला के प्रति गहरी आस्था रखने वाले लीला प्रेमियों ने रातभर जागकर राम दरबार के दर्शन किए। रात बीतने के साथ ही अयोध्या मैदान में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और भोर होते-होते मैदान भक्तों से भर गया। राज्याभिषेक के बाद होने वाली भोर की आरती रामनगर की रामलीला की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
रविवार की भोर करीब पांच बजे अयोध्या मैदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हो चुके थे। श्रीराम के राज्याभिषेक की भोर की आरती में शामिल होने के लिए काशी और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे। मैदान में गूंजते जयघोष, घंटा-घड़ियाल की ध्वनि और महताबी रोशनी से सजी झांकी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। राम और शिव के जयकारों से पूरा लीला स्थल गूंज उठा। इस दौरान काशी नरेश अनंत नारायण सिंह ने भी आरती के दर्शन कर परंपरा का निर्वहन किया। श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक उल्लास और रामलीला के प्रति आस्था का माहौल देखने को मिला।
काशी नरेश राजपरिवार के सदस्यों के साथ पहुंचे अयोध्या मैदान
भोर में करीब साढ़े पांच बजे रामनगर दुर्ग से काशी नरेश अनंत नारायण सिंह राजपरिवार के सदस्यों और दरबारियों के साथ पैदल अयोध्या मैदान पहुंचे। उनके आगमन पर लीला प्रेमियों ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ स्वागत किया। आरती के समय मैदान में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और धार्मिक उल्लास देखते ही बन रहा था। रामनगर की रामलीला में राज्याभिषेक के बाद आयोजित होने वाली भोर की आरती वर्षों से आस्था, परंपरा और राजपरिवार की सहभागिता का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए श्रद्धालु रात से ही मैदान में जुटने लगते हैं और सूर्योदय के समय होने वाली आरती का इंतजार करते हैं।
सूर्योदय के साथ माता कौशल्या ने उतारी राम दरबार की आरती
सुबह 5 बजकर 39 मिनट पर जैसे ही भगवान भास्कर उदित हुए, माता कौशल्या ने अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान प्रभु श्रीराम और माता सीता के साथ लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न तथा हनुमानजी की आरती उतारी। आरती के दौरान घंटा-घड़ियाल बजने लगे और उनकी गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर गया। महताबी रोशनी में सजी झांकी और राजसिंहासन पर विराजमान राम दरबार के दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से प्रतीक्षा कर रहे थे। आरती के समय जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारे लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण रामनगर की रामलीला की पारंपरिक धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विशेष अवसर रहा।
आरती संपन्न होने के बाद पांचों स्वरूपों श्रीराम, सीताजी, भरतजी, लक्ष्मणजी और शत्रुघ्नजी को सेवक अपने कंधों पर बैठाकर गंगा दर्शन के लिए ले गए। गंगा दर्शन के बाद सभी स्वरूपों को बलुआ घाट स्थित धर्मशाला में वापस ले जाया गया। इस तरह राज्याभिषेक की लीला से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया। रामनगर की रामलीला में भोर की आरती को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। यह आयोजन काशी की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
काले हनुमानजी के दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह
राम राज्याभिषेक की भोर की आरती के बाद अब दक्षिणामुखी काले हनुमानजी के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। रामनगर दुर्ग के दक्षिणी छोर पर स्थित इस मंदिर के वर्ष में विशेष अवसर पर खुलने के कारण दर्शन का महत्व और बढ़ जाता है। भक्त बजरंगबली के दर्शन और पूजन के लिए निर्धारित समय का इंतजार करते हैं। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर दर्शन करना अपनी आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं। मंदिर में दर्शन की व्यवस्था को लेकर इस बार दुर्ग प्रशासन और पुलिस ने पहले से तैयारी की है, ताकि अधिक संख्या में पहुंचने वाले लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखा जा सके।
दुर्ग प्रशासन के अनुसार, रविवार 25 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक श्रद्धालु दक्षिणामुखी काले हनुमानजी के दर्शन कर सकेंगे। पिछली बारों में भारी भीड़ के कारण उत्पन्न हुई भगदड़ जैसी स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए संयम और अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। लोगों से अपील है कि वे निर्धारित समय का ध्यान रखें और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों तथा दुर्ग प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। रामनगर में राम राज्याभिषेक की भोर की आरती और दक्षिणामुखी काले हनुमानजी के दर्शन की परंपरा एक बार फिर धार्मिक आस्था, लोकविश्वास और ऐतिहासिक विरासत के संगम के रूप में सामने आई है।
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