बांदा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जेई एक लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई से मचा हड़कंप
बांदा। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच बांदा जनपद में सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) सलमान को कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। सोमवार, 2 नवंबर को हुई इस कार्रवाई में विजिलेंस की झांसी सेक्टर की टीम शामिल रही। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रेनाइट प्लांट संचालक की शिकायत पर गोपनीय जांच के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई थी। आरोप है कि संबंधित प्लांट को भेजे गए नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के बदले एक लाख रुपये की मांग की गई थी।
नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों में सामने आई जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ग्रेनाइट प्लांट का संचालन करता है। उसका आरोप था कि 18 जून 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय की ओर से उसे व्हाट्सऐप के माध्यम से नोटिस भेजा गया था। शिकायतकर्ता का दावा था कि यह नोटिस बिना सर्वे किए भेजा गया था। इसके बाद मामले को लेकर उसे क्षेत्रीय कार्यालय बुलाया गया, जहां से वह संबंधित अधिकारियों के संपर्क में आया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय अधिकारी माधवी कमलवंशी से मुलाकात की थी। इसके बाद उसे जूनियर इंजीनियर सलमान के पास भेजा गया। आरोप है कि जेई ने नोटिस पर आगे की कार्रवाई नहीं करने के बदले एक लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर रकम कम करने की बात भी कही, लेकिन आरोप है कि उससे एक लाख रुपये से कम लेने से इनकार कर दिया गया। हालांकि, ये विवरण शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। मामले में सभी आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
शिकायत के बाद विजिलेंस ने बिछाया जाल
रिश्वत की कथित मांग से परेशान ग्रेनाइट प्लांट संचालक ने रकम देने के बजाय विजिलेंस से शिकायत की। इसके बाद शिकायत की गोपनीय स्तर पर जांच की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में शिकायत से जुड़े आरोप सही पाए जाने के बाद विजिलेंस की झांसी सेक्टर टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई।
सोमवार को निर्धारित योजना के तहत टीम ने बांदा स्थित उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में कार्रवाई की। इसी दौरान जूनियर इंजीनियर सलमान को कथित तौर पर एक लाख रुपये लेते हुए पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई को सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान की महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज, आगे की कार्रवाई जारी
प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ बांदा के कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में आरोपी की अदालत में पेशी, न्यायिक हिरासत अथवा जमानत की स्थिति के संबंध में विस्तृत और स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी नहीं मिली है।
इस मामले में अब जांच के दौरान रिश्वत की कथित मांग, शिकायतकर्ता के बयान और ट्रैप कार्रवाई से जुड़े साक्ष्यों की अहम भूमिका होगी। साथ ही, संबंधित विभाग की भूमिका और नोटिस जारी किए जाने की परिस्थितियों को लेकर भी जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से सरकारी महकमों में चर्चा
सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने की शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों के भरोसे से सीधे जुड़ी होती हैं। बांदा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई की गिरफ्तारी का मामला भी इसी संदर्भ में चर्चा में आया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभागों में औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण, पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन और नोटिस से जुड़ी प्रक्रियाओं का विशेष महत्व होता है। ऐसे में किसी अधिकारी या कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगने पर निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए तथ्यों को स्पष्ट करना आवश्यक है।
फिलहाल, प्राप्त जानकारी के अनुसार, जेई सलमान को एक लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है और मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
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