रामनगर में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण का मामला आया सामने, भाजपा नेता अजय प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया काम
वाराणसी/रामनगर। रामनगर के साहित्य नाका मोड़ के आगे स्थित बंद पड़े पुराने ट्यूबवेल परिसर में सरकारी भूमि पर कथित रूप से कराए जा रहे अनधिकृत निर्माण का मामला शनिवार को सामने आया। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, इस स्थल पर आम जनता की सुविधा के लिए सुलभ शौचालय का निर्माण प्रस्तावित बताया जा रहा है, लेकिन मौके पर किसी अन्य निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा था। मामले की जानकारी मिलने पर निवर्तमान मंडल अध्यक्ष एवं भाजपा वाराणसी महानगर कार्यसमिति सदस्य अजय प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य को लेकर संबंधित लोगों से जानकारी ली।
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 11 बजे अजय प्रताप सिंह जब मौके पर पहुंचे तो वहां निर्माण कार्य कराया जा रहा था। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों से निर्माण की प्रकृति और उसके उद्देश्य के बारे में पूछा। कर्मचारियों की ओर से बताया गया कि उक्त स्थान पर किसी ठेकेदार का कार्यालय बनाया जा रहा है। इस जानकारी के बाद अजय प्रताप सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जलकल विभाग के महाप्रबंधक से संपर्क किया और संबंधित स्थल पर निर्माण कार्य कराए जाने की अनुमति के संबंध में जानकारी मांगी। उनके अनुसार, विभागीय स्तर से इस प्रकार के किसी निर्माण के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।
विभागीय अधिकारियों के पहुंचने के बाद निर्माण कार्य रुकवाया
विभाग से मिली जानकारी के बाद अजय प्रताप सिंह ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। सूचना पर जलकल विभाग के सहायक जेई गोविंद सेठ और पार्षद प्रतिनिधि मनोज यादव भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि ने स्थल का निरीक्षण कर निर्माण से संबंधित जानकारी प्राप्त की। इसके बाद मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रुकवा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद सरकारी भूमि पर निर्माण की अनुमति और उसके वास्तविक उद्देश्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
अजय प्रताप सिंह ने लगाया सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जे का आरोप
अजय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि अरशद द्वारा एक ठेकेदार की कथित मिलीभगत से सरकारी भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विभागीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में निर्माण अवैध पाया जाता है तो उसे तत्काल ध्वस्त कराया जाए और सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर उसके मूल सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाए। साथ ही, सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे अथवा निर्माण में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में अजय प्रताप सिंह ने कहा कि सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जा सकता। जिस स्थान का उपयोग आम जनता की सुविधा के लिए सुलभ शौचालय जैसी आवश्यक जनसुविधा के निर्माण में होना है, वहां किसी अन्य उद्देश्य से बिना अनुमति निर्माण कराया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की, ताकि भविष्य में सरकारी भूमि पर इस तरह के अनधिकृत निर्माण की पुनरावृत्ति न हो।
प्रस्तावित सुलभ शौचालय का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग
उन्होंने संबंधित विभाग से यह भी आग्रह किया कि निर्माण कार्य रुकवाने के बाद केवल औपचारिक कार्रवाई तक मामला सीमित न रहे, बल्कि उक्त स्थल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही, आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वहां प्रस्तावित सुलभ शौचालय के निर्माण की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जाए, जिससे सरकारी भूमि का उपयोग जनहित में सुनिश्चित हो सके।
फिलहाल मौके पर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। अब इस मामले में विभागीय जांच और संबंधित अधिकारियों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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