गुवाहाटी। भारत की असली पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता, समृद्ध परंपराओं और आपसी एकता में निहित है। देश के अलग-अलग राज्यों की भाषा, वेशभूषा, खानपान, लोककला और सांस्कृतिक विरासत भले ही एक-दूसरे से अलग हों, लेकिन राष्ट्रीय एकता का सूत्र सभी को एक साथ जोड़ता है। इसी भावना को साकार करते हुए असम के लोक भवन में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा के अनुरूप विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर असम के महामहिम राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की बहुरंगी विरासत और राष्ट्रीय एकात्मता का संदेश सामने आया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी भारत की बहुरंगी विरासत
समारोह के दौरान प्रस्तुत विभिन्न राज्यों की मनोहारी सांस्कृतिक झलकियों ने उपस्थित लोगों को भारत की लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराया। अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट नृत्य शैलियों, पारंपरिक प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने यह दर्शाया कि भारत की विविधता केवल उसकी भौगोलिक या भाषाई पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सदियों से विकसित हुई साझा सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर राज्य की अपनी विशिष्ट परंपरा और ऐतिहासिक विरासत है, जो भारतीय संस्कृति को और अधिक समृद्ध बनाती है।
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने एकता और सद्भाव पर दिया जोर
इस अवसर पर राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को राष्ट्रीय एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण विचार बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और एकता ही देश की सबसे विशिष्ट पहचान है। विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयों के बीच मौजूद आत्मीयता और राष्ट्रीय भावना देश को एक मजबूत सूत्र में बांधती है।
राज्यपाल का संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक मजबूती उसकी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और नागरिकों के बीच आपसी विश्वास से बनती है। जब देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग एक-दूसरे की परंपराओं, रीति-रिवाजों और जीवनशैली को समझते हैं, तो उनके बीच आत्मीय संबंध और राष्ट्रीय एकजुटता की भावना और मजबूत होती है। ऐसे आयोजन इसी सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’
गौरतलब है कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी समझ और भावनात्मक एकता को प्रोत्साहित करना है। इस पहल के माध्यम से नागरिकों को देश के दूसरे हिस्सों की भाषा, साहित्य, खानपान, कला, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विशेषताओं को जानने का अवसर मिलता है। राज्यों के स्थापना दिवस का आयोजन भी इसी व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है, जिसके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की उपलब्धियों और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिया जाता है।
लोक भवन, असम में आयोजित यह समारोह केवल स्थापना दिवस मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारत की साझा सांस्कृतिक चेतना और विविधता में एकता के मूल भाव को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए यह संदेश सामने आया कि भारत की ताकत उसकी अलग-अलग पहचान को मिटाने में नहीं, बल्कि उन सभी पहचानों को समान सम्मान देते हुए एक साथ आगे बढ़ने में है।
निश्चित रूप से ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की भावना को नई मजबूती देते हैं। भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी विशिष्ट पहचान और गौरव है। यही भावना ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को सार्थक बनाती है।
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