वाराणसी/रामनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का ऐतिहासिक नगर रामनगर इन दिनों बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर चर्चा में है। एक तरफ वाराणसी को धार्मिक पर्यटन और शहरी विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रामनगर के कई इलाकों में सड़क, गलियों, पेयजल, सीवर और सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की पैतृक भूमि, काशी नरेश की ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान में असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य के गृह क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाले रामनगर के नागरिकों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि नगर निगम में शामिल होने के बाद बेहतर व्यवस्था की जो उम्मीद जगी थी, वह अभी तक पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। नियमित रूप से कर और अन्य शुल्क देने के बावजूद नागरिकों को सुरक्षित रास्ते, बेहतर जल निकासी और व्यवस्थित सीवर व्यवस्था के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
तीन महीने से खुदी पड़ी हैं गलियां, आवागमन में लोगों को परेशानी
पुराना रामनगर क्षेत्र में क्षतिग्रस्त गलियों का मामला अब शासन तक पहुंच गया है। स्थानीय पार्षद रामकुमार यादव ने इस समस्या को लेकर शासन को पत्र लिखकर नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्षद के अनुसार लगभग तीन महीने पहले बिजली विभाग की ओर से क्षेत्र की कई गलियों में खुदाई कराई गई थी, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद अब तक उनकी समुचित मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते गलियों की स्थिति खराब बनी हुई है और स्थानीय लोगों को प्रतिदिन आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद का कहना है कि रास्ते उखड़े होने के कारण लोग आते जाते समय गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी इन्हीं क्षतिग्रस्त रास्तों से होकर विद्यालय जाना पड़ता है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इन रास्तों से गुजरना और अधिक मुश्किल हो गया है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब किसी विभाग की ओर से सड़क या गली की खुदाई कराई जाती है तो काम पूरा होने के बाद उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा।
बार बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पार्षद रामकुमार यादव के मुताबिक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने शासन से हस्तक्षेप कर क्षतिग्रस्त गलियों की तत्काल मरम्मत कराने तथा पेयजल और सीवर से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर एक ही रास्ते को अलग अलग कार्यों के लिए खोद दिया जाता है, लेकिन बाद में उसे पहले जैसी स्थिति में लाने की जिम्मेदारी गंभीरता से नहीं निभाई जाती। इसका सीधा असर आम नागरिकों की दिनचर्या पर पड़ता है। खराब रास्तों के कारण पैदल चलने वालों से लेकर दोपहिया वाहन चालकों तक को परेशानी होती है। बारिश अथवा जलभराव की स्थिति में ऐसी गलियों से गुजरना और कठिन हो जाता है। हालांकि खुदाई और मरम्मत में देरी के कारणों को लेकर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला के बीच भी उठे व्यवस्थाओं पर सवाल
रामनगर की पहचान केवल ऐतिहासिक और धार्मिक नगर के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी विश्वप्रसिद्ध रामलीला के कारण भी देश विदेश में है। रामनगर की रामलीला काशी की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे देखने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु तथा पर्यटक पहुंचते हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के दौरान भी क्षेत्र की बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दिए। लोगों का कहना है कि आयोजन स्थलों तक पहुंचने वाले रास्तों, गलियों की मरम्मत, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था। रामलीला का आयोजन संपन्न होने के बाद भी क्षेत्र की कई समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब रामनगर में इतने बड़े स्तर का सांस्कृतिक आयोजन होता है तो उस दौरान नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से नागरिक सुविधाओं की नियमित समीक्षा क्यों नहीं की जाती।
जीवित्पुत्रिका पर्व पर परेशानी, दीपावली और डाला छठ से पहले बढ़ी चिंता
स्थानीय नागरिकों के अनुसार जीवित्पुत्रिका पर्व के दौरान भी महिलाओं और परिवारों को आवागमन तथा स्थानीय व्यवस्थाओं से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब दीपावली और डाला छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व सामने हैं। इन अवसरों पर बाजारों, धार्मिक स्थलों और घाटों की ओर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। विशेष रूप से डाला छठ के दौरान व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं को घाटों तथा पूजा स्थलों तक पहुंचने के लिए साफ और सुरक्षित रास्तों की आवश्यकता होती है। ऐसे में क्षतिग्रस्त गलियों, जल निकासी की समस्या और सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नागरिक चाहते हैं कि त्योहारों से पहले सड़कों और गलियों की मरम्मत कराई जाए, नालियों और सीवर की सफाई सुनिश्चित हो तथा सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता की व्यवस्था की जाए। लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए नगर निगम को पहले से तैयारी करनी चाहिए।
ट्यूबवेल में लगातार चोरी की घटनाओं को लेकर पार्षद ने जताई चिंता
रामनगर में सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया है। पार्षद रामकुमार यादव ने क्षेत्र के ट्यूबवेल में लगातार चोरी होने की घटनाओं को लेकर चिंता जताई है। संवाददाता से बातचीत में उन्होंने बताया कि ट्यूबवेल में बार बार चोरी की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन उनके अनुसार नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ट्यूबवेल पेयजल व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन है। ऐसे में इससे संबंधित उपकरणों की चोरी होने पर जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। पार्षद ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद संतोषजनक सुनवाई नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि जनसमस्याओं के समाधान को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इन आरोपों पर संबंधित विभाग और प्रशासन का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।
नगर पालिका से नगर निगम में शामिल होने के बाद भी सुविधाओं की प्रतीक्षा
रामनगर की मौजूदा स्थिति के बीच नगर पालिका से नगर निगम में शामिल होने के बाद नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीदों को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम में शामिल किए जाने के पीछे बेहतर सड़क, सीवर, पेयजल, सफाई और शहरी विकास जैसी सुविधाओं की अपेक्षा थी। नागरिकों को उम्मीद थी कि बड़े नगर निकाय का हिस्सा बनने के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों की गति बढ़ेगी और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन मौजूदा शिकायतों के चलते लोग व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नागरिकों से कर और अन्य शुल्क लेने के साथ उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी नगर निगम की जिम्मेदारी है। लोगों की अपेक्षा है कि केवल योजनाओं और घोषणाओं तक विकास सीमित न रहे, बल्कि उसका असर रामनगर की गलियों और मोहल्लों में भी दिखाई दे।
शासन और नगर निगम प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पुराना रामनगर के पार्षद रामकुमार यादव की ओर से शासन को भेजे गए पत्र के बाद क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि लगभग तीन महीने से खुदी पड़ी गलियों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए। पेयजल और सीवर से जुड़ी शिकायतों का स्थायी समाधान निकाला जाए तथा ट्यूबवेल में चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए जाएं। इसके साथ ही दीपावली और डाला छठ से पहले सफाई, जल निकासी और आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त की जाए। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करते हैं।
रामनगर के नागरिकों की मांग किसी विशेष सुविधा या वीआईपी व्यवस्था की नहीं, बल्कि उन बुनियादी सुविधाओं की है जो प्रत्येक शहरी क्षेत्र के निवासियों को मिलनी चाहिए। सुरक्षित सड़कें, साफ गलियां, नियमित पेयजल आपूर्ति, व्यवस्थित सीवर व्यवस्था और सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा किसी भी नगर की आवश्यक जरूरतें हैं। ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक पहचान रखने वाले रामनगर में इन सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आना संबंधित विभागों के लिए ध्यान देने का विषय है। विकास की वास्तविक तस्वीर तभी सामने आती है जब उसका लाभ आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई दे। फिलहाल रामनगर के लोग आश्वासनों के बजाय धरातल पर काम और अपनी समस्याओं के समयबद्ध समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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