लंका से रामनगर तक जाम का जाल: आखिर कब जागेगा प्रशासन, कब मिलेगी जनता को राहत? प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में रोजाना सड़क पर जूझ रही जनता
वाराणसी। प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र काशी में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन लंका से रामनगर तक लगने वाला भीषण जाम आम जनता के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। इस मार्ग पर जाम लगना अब असामान्य घटना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। नौकरीपेशा लोगों से लेकर व्यापारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और आम राहगीरों तक को घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस अव्यवस्था से जनता को स्थायी राहत कब मिलेगी?
लंका से सामनेघाट पुल होते हुए रामनगर तक का मार्ग वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सुबह के समय जब कार्यालय, स्कूल-कॉलेज और अस्पताल पहुंचने की जल्दी होती है, उसी दौरान वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कुछ मिनटों का सफर तय करने में लोगों को घंटों लग जाते हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है।
मंगलवार सुबह आठ बजे से जाम में फंसे रहे वाहन
मंगलवार सुबह करीब आठ बजे से ही लंका से सामनेघाट पुल होते हुए रामनगर तक यातायात प्रभावित रहा। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दोपहिया, चारपहिया और ऑटो समेत तमाम वाहन रेंगते नजर आए। काम पर जाने वाले लोग समय से कार्यालय नहीं पहुंच सके, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सबसे गंभीर स्थिति उन लोगों के लिए होती है, जिन्हें किसी मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचना होता है। जाम में एंबुलेंस या अन्य जरूरी वाहनों के फंसने की आशंका भी चिंता बढ़ाती है। स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है। आम नागरिकों के लिए सड़क पर निकलना ही रोजाना की चुनौती बनता जा रहा है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद भी जाम से राहत क्यों नहीं?
शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर ठेले-खोमचे हटाए गए, दुकानों पर कार्रवाई हुई और कई स्थानों पर अभियान चलाए गए। प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराना और व्यवस्था सुधारना रहा है। लेकिन सवाल यह है कि इन कार्रवाइयों के बावजूद लंका से रामनगर तक जाम की समस्या कम क्यों नहीं हो रही?
क्या इस मार्ग पर जाम की वजह केवल अतिक्रमण है? वाहनों का अनियंत्रित ठहराव, अवैध पार्किंग, पुल के आसपास यातायात का दबाव और पीक आवर में प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन की कमी जैसे पहलुओं पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। केवल अतिक्रमण हटाने से स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए पूरे मार्ग की यातायात व्यवस्था का आकलन और नियमित निगरानी जरूरी है।
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में जनता रोज जाम से परेशान
काशी देश के प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है। यहां विकास और आधुनिक सुविधाओं को लेकर बड़े स्तर पर काम हो रहा है। ऐसे में शहर के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर रोजाना लगने वाला जाम व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार विभागों के सामने बड़ा सवाल खड़ा करता है। विकास का वास्तविक लाभ तभी आम नागरिक तक पहुंचेगा, जब उसे बिना अनावश्यक परेशानी के अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी।
जनता यह नहीं पूछ रही कि कितने अभियान चलाए गए या कितनी दुकानें हटाई गईं। उसका सीधा सवाल है कि रोजाना लगने वाले जाम से मुक्ति कब मिलेगी? यदि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जिम्मेदार विभाग मौजूद हैं, तो उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
संयुक्त कार्ययोजना से ही मिल सकती है स्थायी राहत
लंका से रामनगर तक यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और प्रशासन को मिलकर ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। पूरे मार्ग का यातायात ऑडिट कर जाम के प्रमुख बिंदुओं को चिह्नित किया जाए। जरूरत के अनुसार पीक आवर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई, वाहनों के ठहराव पर नियंत्रण और पुल के दोनों ओर यातायात का बेहतर प्रबंधन किया जाना चाहिए। साथ ही दीर्घकालिक समाधान के लिए सड़क की क्षमता और वाहनों के दबाव का तकनीकी आकलन भी जरूरी है।
जनता को आश्वासन नहीं, सड़कों पर राहत चाहिए
लंका से रामनगर तक लगने वाला जाम अब केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। मरीजों को अस्पताल पहुंचने की चिंता है, स्कूली बच्चों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और नौकरीपेशा लोग रोज अपने कीमती समय से समझौता कर रहे हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
काशी की जनता को भाषण या कागजों पर बनी योजनाएं नहीं, बल्कि सड़कों पर दिखाई देने वाला बदलाव चाहिए। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ यातायात व्यवस्था को भी प्राथमिकता देनी होगी। अब सवाल यही है कि क्या लंका से रामनगर तक के इस महत्वपूर्ण मार्ग को जाम से राहत मिल पाएगी, या फिर हर सुबह आम नागरिक इसी अव्यवस्था से जूझता रहेगा?
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