मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन को लेकर वाराणसी पुलिस अलर्ट, पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी ने किया मंदिर का निरीक्षण
वाराणसी। धर्म और आध्यात्मिक आस्था की नगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। आगामी 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक पांच दिनों के लिए मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 11 बजकर 15 मिनट तक श्रद्धालु मां के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के लिए संभावित भारी भीड़ को देखते हुए गुरुवार 5 नवंबर को पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी वाराणसी सत्येन्द्र कुमार ने मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग, पार्किंग और श्रद्धालुओं के आवागमन से संबंधित तैयारियों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी ने मंदिर के महंत शंकरपुरी महाराज से संवाद कर दर्शन व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाने के संबंध में सुझाव प्राप्त किए। अधिकारियों ने पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दर्शन अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने और व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का उद्देश्य है कि पांच दिनों तक चलने वाले इस विशेष दर्शन आयोजन में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और दर्शन व्यवस्था सुव्यवस्थित बनी रहे।
सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से होगी भीड़ की निगरानी
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनके माध्यम से कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ की गतिविधियों और विभिन्न स्थानों पर बन रहे दबाव पर नजर रखने को कहा गया। अधिकारियों ने निर्देशित किया कि किसी भी असामान्य स्थिति या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात अधिकारी कंट्रोल रूम से मिलने वाली सूचनाओं पर गंभीरता से ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर संबंधित टीम को तत्काल मौके पर भेजें।
पुलिस आयुक्त ने ड्यूटी प्वाइंट्स का निरीक्षण करते हुए वहां तैनात पुलिसकर्मियों को पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए। मंदिर में आने और बाहर निकलने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए एकल मार्ग व्यवस्था का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया। प्रवेश और निकास मार्गों पर विशेष निगरानी रखने तथा किसी भी स्थान पर अनावश्यक भीड़ एकत्रित नहीं होने देने के निर्देश दिए गए। भीड़ का दबाव बढ़ने की स्थिति में तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
महिला सुरक्षा और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष जोर
दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं के साथ विनम्र और सहयोगात्मक व्यवहार रखें। श्रद्धालुओं को सर और मैडम कहकर संबोधित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया। किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए पुलिसकर्मियों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए।
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मंदिर परिसर और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त महिला पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही सादे वस्त्रों में महिला पुलिसकर्मियों को सक्रिय रखने और इंटेलिजेंस यूनिट के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों तथा गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए।
जेबकतरों और अराजक तत्वों पर रहेगी पुलिस की नजर
मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जेबकतरों और श्रद्धालुओं को परेशान करने वाले अराजक तत्वों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधिकारियों को ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया। मंदिर परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि भीड़ के बीच लगातार सक्रिय रहकर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखें।
व्यापारियों से अतिक्रमण हटाने और सीसीटीवी लगाने की अपील
मंदिर के आसपास की सड़कों और गलियों में श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों से भी संवाद किया। उन्हें मंदिर के आसपास अतिक्रमण मुक्त व्यवस्था बनाए रखने तथा दुकानों का सामान सड़क और गलियों तक नहीं फैलाने के निर्देश दिए गए। व्यापारियों से अपने प्रतिष्ठानों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाने और सुरक्षा व्यवस्था में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि रास्तों पर अतिक्रमण होने से भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए सभी दुकानदार निर्धारित सीमाओं के भीतर ही अपनी दुकानें संचालित करें।
इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग, पार्किंग तथा श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए निर्धारित मार्गों का भी निरीक्षण किया गया। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि दर्शन अवधि के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करें। आवश्यकता के अनुसार व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही बाधित न हो। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए भी संबंधित विभागों को पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए गए।
पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था एवं मुख्यालय शिवहरी मीणा, पुलिस उपायुक्त काशी जोन गौरव बंशवाल, पुलिस उपायुक्त यातायात अनिल कुमार, संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त, थाना प्रभारी सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर सुरक्षा और यातायात से संबंधित तैयारियों की जानकारी ली तथा आवश्यक व्यवस्थाओं को समय से पूरा कराने के निर्देश दिए।
मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए 6 नवंबर से शुरू होने वाली पांच दिवसीय दर्शन अवधि के मद्देनजर वाराणसी पुलिस और जिला प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार के निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि दर्शन अवधि में लगातार निगरानी और समन्वय बनाए रखें। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, भीड़ को नियंत्रित रखने और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया है।
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