वाराणसी(रामनगर): धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में हनुमान जयंती का पर्व रविवार को श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर काशी के प्रमुख हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। विशेष रूप से नगवा स्थित प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर में बजरंगबली की साल में एक बार होने वाली विशेष झांकी के दर्शन के लिए भक्तों में जबरदस्त उत्साह रहा। सुबह से ही मंदिर के बाहर दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। दूरदराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा करते नजर आए। मंदिर में विधि विधान से पूजन अर्चन और विशेष आरती संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए पट खोले गए। पट खुलते ही मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय हनुमान के जयघोष से गूंज उठा। पूरे दिन संकट मोचन धाम में भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहा।
विशेष झांकी में बजरंगबली के मनोहारी स्वरूप के हुए दर्शन
हनुमान जयंती के अवसर पर संकट मोचन मंदिर को फूलों और आकर्षक सजावटी सामग्री से भव्य रूप में सजाया गया था। मंदिर में बजरंगबली का विशेष शृंगार किया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। विशेष झांकी में प्रभु के मनोहारी स्वरूप का दर्शन कर भक्त भावविभोर दिखाई दिए। वाराणसी के अलावा आसपास के जनपदों और दूरदराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु संकट मोचन धाम पहुंचे। भक्तों ने कतारबद्ध होकर दर्शन पूजन किया और अपने परिवार की सुख समृद्धि, आरोग्य, खुशहाली तथा जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना की। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर में दर्शनार्थियों का आवागमन जारी रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और लगातार गूंजते जयकारों से पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
विशेष आरती के बाद महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने वितरित किया प्रसाद
संकट मोचन मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि विधान के साथ संपन्न कराए गए। बजरंगबली की विशेष आरती उतारी गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पूजन की व्यवस्था शुरू हुई। इस दौरान मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्तों ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया। भजन कीर्तन और बजरंगबली के जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर में उमड़ी भीड़ ने काशी की धार्मिक परंपराओं और संकट मोचन के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को प्रदर्शित किया। संकट मोचन मंदिर काशी की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जहां विशेष पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं।
दुर्गाकुंड से मैदागिन तक प्रमुख हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन
हनुमान जयंती का उत्साह केवल संकट मोचन मंदिर तक सीमित नहीं रहा। शहर के दूसरे प्रमुख हनुमान मंदिरों में भी विशेष पूजन अर्चन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दुर्गाकुंड स्थित बनकटी हनुमान मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। वहीं नगवा स्थित बड़े हनुमान मंदिर और मैदागिन के शांतिकरण हनुमान मंदिर में भी भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों को फूलों से सजाया गया था और श्रद्धालुओं ने दर्शन के बाद अपने परिवार की सुख शांति और मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। शहर के विभिन्न इलाकों में धार्मिक आयोजन, भजन कीर्तन और पूजा पाठ के बीच पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा। हनुमान जयंती के अवसर पर काशी के अलग अलग क्षेत्रों में लोगों की धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी देखने को मिली।
गंगा पार रामनगर में भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनी हनुमान जयंती
गंगा पार ऐतिहासिक नगर रामनगर में भी हनुमान जयंती का पर्व श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। नगर के बलुआ घाट स्थित हनुमान मंदिर और रामनगर किले के समीप स्थित हनुमान मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने बजरंगबली के दर्शन पूजन किए। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने पूजा पाठ और आराधना के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया तथा परिवार की सुख शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बजरंगबली के जयकारे गूंजते रहे। गंगा पार रामनगर में भी हनुमत भक्ति का विशेष उत्साह देखने को मिला। स्थानीय श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से पर्व मनाते हुए अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इस दौरान नगर के विभिन्न मंदिरों में दर्शन पूजन का सिलसिला जारी रहा।
विशेष लग्न में हुई हनुमत आराधना, सिंदूर और तिल के तेल से किया विशेष शृंगार
हनुमान जयंती के विशेष पूजन को लेकर ज्योतिषाचार्य पं. जितेंद्र शास्त्री उर्फ विपिन तिवारी ने बताया कि हनुमत आराधना के लिए मेष लग्न का शुभ समय शाम 4 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक निर्धारित था। इस अवधि में श्रद्धालुओं ने विधि विधान से बजरंगबली की पूजा अर्चना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्तों ने तिल के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को अर्पित किया। इसके साथ ही पुष्पमालाओं से शृंगार कर मोदक, चूरमा और ऋतुफल का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने बजरंगबली से अपने परिवार की रक्षा, सुख समृद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की। हनुमान जयंती पर विशेष लग्न में पूजा करने को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह रहा और विभिन्न मंदिरों में पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार आराधना की गई।
काशी की धार्मिक परंपराओं में दिखाई दी हनुमत भक्ति की झलक
हनुमान जयंती के अवसर पर काशी के प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर से लेकर शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों और गंगा पार रामनगर तक श्रद्धा और भक्ति का व्यापक वातावरण देखने को मिला। कहीं विशेष झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं तो कहीं आरती, भजन कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से बजरंगबली की आराधना की गई। मंदिरों में गूंजते जयकारों और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने पर्व की धार्मिक महत्ता को प्रदर्शित किया। काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में हनुमान जयंती का विशेष स्थान है। इस पर्व पर संकट मोचन मंदिर में उमड़ी भीड़ और शहर के विभिन्न हिस्सों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों ने एक बार फिर बजरंगबली के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति को सामने रखा।
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