वाराणसी के संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक लिपिक विनय कुमार सिंह से कथित मारपीट का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इस प्रकरण में पहले विकास इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ एके सिंह की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद अब विनय कुमार सिंह ने न्यायालय की शरण लेकर डॉ एके सिंह पर पिटाई सरकारी कार्य में बाधा और डकैती सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। कोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में यह मामला दर्ज किया गया है जिसमें एक अन्य संतोष पांडेय सहित अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
यह विवाद 69वीं नेशनल विद्यालयीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है। विनय कुमार सिंह के अनुसार 19 से 21 नवंबर 2025 तक वाराणसी के बड़ा लालपुर क्षेत्र में इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। आयोजन से संबंधित कार्य विनेहा कंस्ट्रक्शन सल्यूशन इमिलिया घाट द्वारा किया गया था। प्रतियोगिता के बाद एक दिसंबर 2015 को भुगतान से जुड़ा बिल संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में जमा किया गया। विनय कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि दो दिसंबर 2025 को दोपहर करीब तीन बजे कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक कार्यालय पहुंचे और बिल के संबंध में बातचीत की। उस समय कार्यालय के अकाउंटेंट शोभनाथ बाबू अवकाश पर थे इसलिए उन्हें बाद में आने के लिए कहा गया जिसके बाद वे चले गए।
विनय कुमार सिंह का आरोप है कि इसके कुछ ही समय बाद उन्हें फोन पर धमकी दी गई और बिल पास न होने को लेकर दबाव बनाया गया। आरोप के अनुसार विकास इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ एके सिंह ने फोन पर गाली गलौज की और थोड़ी देर बाद कार्यालय पहुंचकर मारपीट की। विनय का यह भी कहना है कि इस दौरान सरकारी अभिलेख भी उठा लिए गए। उन्होंने पहले कैंट थाने में शिकायत करने का प्रयास किया लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया जिसके बाद कोर्ट के निर्देश पर अब प्राथमिकी दर्ज की गई है। कैंट थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा के अनुसार न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बीएनएस की धारा 115(2) 121(1) 132 309(4) 324(4) 351(3) और 352 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
दूसरी ओर डॉ अशोक सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को कमीशन मांग से जुड़ा बताया है। उनका कहना है कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वाधान में लालपुर स्टेडियम वाराणसी में 19 से 21 नवंबर तक 69वीं विद्यालयीय तीरंदाजी नेशनल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था जिसमें वे संयुक्त आयोजक थे। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद जब भुगतान के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में बिल जमा किया गया तो वहां कमीशन की मांग की गई। डॉ अशोक सिंह के अनुसार पहले 13 लाख रुपये के बिल पर पांच प्रतिशत कमीशन लिया गया। उस समय उनकी माता को हार्ट अटैक आया था और वे अस्पताल में भर्ती थीं इसलिए वे स्वयं कार्यालय नहीं जा सके थे। होटल के बिलों का भुगतान जरूरी होने के कारण उनके सहयोगी ने कमीशन देकर बिल पास कराया।
डॉ अशोक सिंह का आरोप है कि इसके बाद जब 18 लाख रुपये का दूसरा बिल जमा किया गया तो इस पर दस प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। दो दिसंबर को उनके सहयोगी ने उन्हें फोन कर पूरी स्थिति बताई। इसके बाद वे अपनी माता के इलाज के बीच त्रिमूर्ति अस्पताल से सीधे संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय पहुंचे। डॉ अशोक सिंह का कहना है कि वहां बिल को लेकर पूछताछ करने पर लिपिक विनय कुमार सिंह ने अभद्र व्यवहार किया और गाली गलौज करते हुए साथियों के साथ धक्का मुक्की की जिससे उनके पैर में चोट आई।
फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के आरोप सामने हैं और कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमे के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। भुगतान प्रक्रिया से जुड़े आरोपों और कार्यालय में हुई कथित मारपीट की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। मामले पर शिक्षा विभाग और प्रशासन की नजर बनी हुई है क्योंकि यह विवाद सरकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता से भी जुड़ा माना जा रहा है।

