कोलकाता: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सोमवार को अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग से कहा है कि जिन करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नामों पर तार्किक विसंगतियों के आधार पर आपत्ति दर्ज की गई है, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोग मानसिक दबाव में हैं। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए राज्य में लगभग दो करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
अदालत को बताया गया कि नोटिस मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में जारी किए गए हैं। मैप्ड, अनमैप्ड और लॉजिकल विसंगति। लॉजिकल विसंगति के अंतर्गत पिता के नाम में अंतर, माता-पिता की आयु में असंगति और दादा-दादी की आयु से जुड़ी गड़बड़ियों जैसे मामलों को शामिल किया गया है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि अकेले इस श्रेणी में ही लगभग 1.25 करोड़ मतदाता सूचीबद्ध हैं।
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि इन मतदाताओं के नाम पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत भवनों, प्रखंड कार्यालयों और शहरी वार्ड कार्यालयों में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि प्रभावित लोग समय रहते अपनी आपत्ति या दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची से जुड़े कई मामलों में माता-पिता और संतानों के नामों का मेल न होना, तथा मतदाता और उनके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना जैसी विसंगतियां दर्ज की गई हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी संभावित प्रभावित मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत भवनों और प्रखंड कार्यालयों में इसके लिए अलग काउंटर स्थापित किए जाएं। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह राज्य निर्वाचन आयोग को पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। प्रत्येक जिले को निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
इसके साथ ही अदालत ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, जिससे पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया में मनमानेपन और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए मतदाता सूची की शुद्धता जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
